जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक विचारधारा अलग लेकिन हरियाणा की खुशहाली साझा मंजिल:नायब सैनी
संविधान पखवाड़े में जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को किया संबोधित
चंडीगढ़, 02 नवंबर (हि.स.)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक राहें और विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हरियाणा की प्रगति और प्रदेश के लोगों की खुशहाली सभी की साझा मंजिल है। हम सभी की पहचान इस बात से है कि हम हरियाणा की जनता के प्रतिनिधि हैं। जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे जनता की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं को समझते हुए प्रदेश के विकास में अपना योगदान दें।
मुख्यमंत्री सोमवार को पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा द्वारा संविधान पखवाड़े के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा ने अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर लिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 नवंबर, 1966 को हरियाणा अस्तित्व में आया था और उस समय विधानसभा में 54 सदस्य थे। वर्ष 1967 में विधानसभा सीटों की संख्या 81 हुई और वर्ष 1977 में बढक़र 90 हो गई। उन्होंने कहा कि इन सीटों में आज बढ़ोतरी की आवश्यकता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी हो सके और आम जनता को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं सुलभ हो सके। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश 15वीं विधानसभा के दौर में अपनी लोकतांत्रिक यात्रा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि 6 दिसंबर, 1966 को हरियाणा विधानसभा की पहली बैठक हुई थी। उस समय संसाधन सीमित थे और शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई, बिजली, सडक़ तथा प्रशासनिक व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना बड़ी चुनौती थी।
उन्होंने कहा कि संविधान का सम्मान हमारे निर्णयों और आचरण में दिखाई देना चाहिए। संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्श निहित हैं। जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि इन आदर्शों को शासन के व्यवहार में उतारें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा कानून बनाने, सार्वजनिक धन के उपयोग को स्वीकृति देने और सरकार को जवाबदेह बनाने का महत्वपूर्ण मंच है। सदन में उठाया गया सार्थक प्रश्न किसी गांव की समस्या को समाधान तक पहुंचा सकता है और किसी विधेयक पर दिया गया उपयोगी सुझाव लाखों नागरिकों का जीवन बेहतर बना सकता है। जनप्रतिनिधियों को तर्कों से एक-दूसरे के विचारों को चुनौती देनी चाहिए और अपने आचरण से लोकतंत्र तथा संविधान के प्रति जनता का विश्वास बढ़ाना चाहिए।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज डिजिटल माध्यमों से नागरिक जनप्रतिनिधियों के शब्दों और व्यवहार को तुरंत देखते हैं। विशेष रूप से युवा पीढ़ी उनसे सीखती है कि सार्वजनिक जीवन में असहमति कैसे व्यक्त की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान पखवाड़े की सार्थकता तभी बढ़ेगी, जब इसकी चर्चा सभागारों से निकलकर गांवों, विद्यालयों और बस्तियों तक पहुंचेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित हरियाणा के निर्माण में जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। किसी क्षेत्र की आवश्यकताओं को वहां रहने वाले लोग सबसे अच्छी तरह समझते हैं। जब योजना बनाने में नागरिक सहभागी होता है, तो उसके क्रियान्वयन और सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा के प्रति उसका जुड़ाव भी बढ़ता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

