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चंडीगढ़: मंडियों में जटिल खरीद प्रक्रिया से किसान फसल बेचने से पहले हुए परेशान: रणदीप सुरजेवाला

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चंडीगढ़: मंडियों में जटिल खरीद प्रक्रिया से किसान फसल बेचने से पहले हुए परेशान: रणदीप सुरजेवाला


-राज्यसभा सांसद सुरजेवाला ने ट्रैक्टर-ट्रॉली, बायोमेट्रिक और समय सीमा जैसी शर्तों पर उठाए सवाल

-आरोप-सरकार नई शर्तों से एमएसपी खरीद को सीमित करने की कोशिश

चंडीगढ़, 29 मार्च (हि.स.)। कांग्रेस के राष्ट्रीय महसचिव एवं राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा सरकार द्वारा रबी सीजन में फसल खरीद पर लगाई शर्तों पर सवाल उठाते हुए नायब सरकार को घेरा। उन्होंने ट्रैक्टर-ट्राली और बायोमेट्रिक शर्तों को तुगलकी फरमानों के जरिये किसानों को परेशानी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार चोर दरवाजे से न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश रच रही है।

रविवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकारें तीन कृषि कानूनों की वापसी के बाद अब नई प्रक्रियागत बाधाओं के जरिए किसानों को फसल बेचने से रोकने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर खरीद प्रक्रिया को इतना जटिल बना रही है कि किसान खुद ही मंडियों में आने से हतोत्साहित हो जाए। इस दौरान भूपेंद्र सिंह भूप्पी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

उन्होंने ट्रैक्टर-ट्रॉली से जुड़े नए नियमों पर सवाल उठाते हुए किसानों पर अपनी फसल ट्रैक्टर-ट्रॉली में लाने, उस पर नंबर लिखने, फोटो खींचकर पोर्टल पर अपलोड करने जैसी शर्तें थोपने का विरोध जताया। सुरजेवाला ने पूछा कि जिन किसानों के पास खुद का ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं है, वे इस प्रक्रिया का पालन कैसे करेंगे, और क्या किराए के साधनों के इस्तेमाल पर कार्रवाई नहीं होगी।

दूसरा बड़ा मुद्दा उन्होंने समय सीमा को लेकर उठाया। सरकार ने मंडी में फसल लाने का समय सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक तय कर दिया है।

सुरजेवाला ने कहा कि कटाई के सीजन में फसल अक्सर रात में भी मंडियों में पहुंचती है। ऐसे में यह पाबंदी लंबी कतारें, बढ़ता खर्च और किसानों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बनेगी।

मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर बायोमेट्रिक सत्यापन अव्यावहारिक

सुरजेवाला ने ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के तहत बायोमेट्रिक सत्यापन की अनिवार्यता को अव्यावहारिक बताया। उनका कहना है कि किसान को हर बार खुद मंडी में उपस्थित होकर अंगूठा लगाना होगा, जबकि कटाई के दौरान वह खेत में व्यस्त रहता है। साथ ही, तकनीकी दिक्कतों और इंटरनेट समस्याओं के कारण यह प्रक्रिया और जटिल हो सकती है। सुरजेवाला ने भूमिहीन किसानों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जो किसान पट्टे पर जमीन लेकर खेती करते हैं, उनके लिए जमीन मालिक की अनुपस्थिति में फसल बेचना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने गेहूं खरीद का लक्ष्य 80 लाख टन से घटाकर 72 लाख टन कर दिया है, जबकि लाखों किसानों ने फसल पंजीकरण कराया है। साथ ही बारदाने की भारी कमी और पोर्टल डेटा में गड़बड़ी को भी उन्होंने सरकार की “सोची-समझी रणनीति” करार दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा