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कैथल: ‘प्यारी बेटियां’ पहल से बदलेगा सोच का नजरिया, हर गांव से चुनी जाएंगी दो रोल मॉडल बेटियां

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कैथल: ‘प्यारी बेटियां’ पहल से बदलेगा सोच का नजरिया, हर गांव से चुनी जाएंगी दो रोल मॉडल बेटियां


कैथल, 12 मई (हि.स.)। जिले में गिरते लिंगानुपात को सुधारने और बेटियों को सम्मान देने के लिए प्रशासन ने ‘प्यारी बेटियां’ नाम से नई पहल शुरू की है। इस योजना के तहत हर गांव से दो ऐसी बेटियों का चयन किया जाएगा, जिन्होंने किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल कर गांव या परिवार का नाम रोशन किया हो। इन बेटियों को आगे बढ़ाने और अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनाने के उद्देश्य से जिला स्तर पर एक कोर टीम भी बनाई जाएगी। डीसी अपराजिता ने मंगलवार को लघु सचिवालय में जिले के सबसे ज्यादा और सबसे कम लिंगानुपात वाले 20 गांवों के सरपंचों के साथ बैठक में यह निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिले का लिंगानुपात 890 तक पहुंचना चिंताजनक है और इसमें सुधार के लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर काम करना होगा। डीसी ने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर रही हैं और समाज की सोच बदलने की जरूरत है। उन्होंने खाप पंचायतों और सामाजिक संगठनों से भी अपील की कि वे कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीति को खत्म करने के लिए आगे आएं।

बैठक में सरपंचों ने भी अपने सुझाव रखे। कुछ सरपंचों ने बताया कि वे अपने स्तर पर बेटी के जन्म पर आर्थिक सहायता या अन्य प्रोत्साहन दे रहे हैं। वहीं यह सुझाव भी आया कि संपन्न परिवार गरीब परिवारों की बेटियों को आर्थिक रूप से गोद लेकर उनकी शिक्षा और परवरिश में सहयोग कर सकते हैं। डीसी ने इन प्रयासों को सराहनीय बताते हुए सामाजिक जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

डीसी ने आशा वर्कर्स की भूमिका को भी अहम बताते हुए निर्देश दिए कि जहां लिंगानुपात बेहतर है वहां कार्यरत आशा वर्कर्स को सम्मानित किया जाए, जबकि कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में उनके कार्य की समीक्षा की जाए। उन्होंने बताया कि जिन गांवों में लिंगानुपात 1000 से अधिक है, उनमें ककहेड़ी, ग्योंग, खरकां, फतेहपुर, कैलरम, बरटा, खरक पांडवा, हाबड़ी, मटौर और काकौत शामिल हैं। इन गांवों के सरपंचों को बधाई देते हुए उन्होंने अन्य गांवों से भी इसी दिशा में प्रयास करने का आह्वान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे