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सोनीपत: विकसित भारत में महिलाओं को होगा अहम योगदान: चैयरपर्सन रेनू भाटिया

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सोनीपत: विकसित भारत में महिलाओं को होगा अहम योगदान: चैयरपर्सन रेनू भाटिया


सोनीपत: विकसित भारत में महिलाओं को होगा अहम योगदान: चैयरपर्सन रेनू भाटिया


विकसित भारत - 2047 के लिए महिला

सशक्तिकरण राष्ट्रीय संकल्प : प्रो. प्रकाश सिंह

सोनीपत, 24 फ़रवरी (हि.स.)। सोनीपत

दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

विश्वविद्यालय, मुरथल में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में विकसित भारत 2047

विषय पर कार्यक्रम मंगलवार को आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हरियाणा महिला आयोग की

अध्यक्षा रेनू भाटिया ने मुख्य अतिथि के रूप में छात्राओं को संबोधित किया। कार्यक्रम

की अध्यक्षता कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह ने की तथा कुलसचिव प्रो. आशुतोष मिश्रा सहित

विभिन्न विभागाध्यक्ष और प्राध्यापक उपस्थित रहे।

रेनू

भाटिया ने कहा कि छात्राओं और महिलाओं को यदि किसी प्रकार की समस्या हो तो वे निःसंकोच

उनसे मिल सकती हैं, उनकी समस्याओं का समाधान तुरंत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बेटियों

में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन

किया है। भारतीय संस्कृति में नारी सम्मान को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा

कि देश तभी विकसित बनेगा, जब आधी आबादी की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी। उन्होंने

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि हमें उनके सपनों

का भारत बनाने के लिए मिलकर योगदान देना होगा।

कुलपति

प्रो. प्रकाश सिंह ने कहा कि वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने पर विकसित

राष्ट्र का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब महिला सशक्तिकरण को विकास की आधारशिला बनाया

जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राष्ट्र का समग्र विकास तब तक संभव नहीं, जब

तक महिलाओं की समान भागीदारी न हो। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का प्रथम स्तंभ

शिक्षा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को समावेशी बनाने का प्रयास

किया गया है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित के क्षेत्रों में छात्राओं

की बढ़ती भागीदारी तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में महिला वैज्ञानिकों की सक्रिय

भूमिका इसका प्रमाण है। आर्थिक सशक्तिकरण के अंतर्गत रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास

और उद्यमिता को आवश्यक बताया गया। स्वयं सहायता समूह और लखपति दीदी जैसी पहलें ग्रामीण

महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं। उन्होंने

सुरक्षा, सम्मान और नेतृत्व में भागीदारी को भी आवश्यक बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों

को समानता और नवाचार के केंद्र बनना चाहिए। इस अवसर पर एनएसएस कीर्डिनेटर प्रो.अनिल

सिंधु, प्रो.संजु सैनी व विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष व प्रोफेसर उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / नरेंद्र शर्मा परवाना