शिवालिक के जंगलों में तेंदुए समेत 423 वन्यजीव संकेत मिले
-अकरम खान के सवाल पर वन्य जीव मंत्री ने पेश की रिपोर्ट
चंडीगढ़, 27 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा के शिवालिक जंगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर विधानसभा में सामने आए आंकड़े जंगल की एक दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं। शिवालिक क्षेत्र में किए गए व्यापक सर्वेक्षण के दौरान 423 वन्यजीव संकेत दर्ज किए गए और इनमें सबसे ज्यादा संकेत तेंदुए के मिले। सर्वेक्षण में तेंदुए की मौजूदगी के 76 संकेत दर्ज हुए, जबकि सांभर और नीलगाय के 60-60 संकेत मिले। इसके अलावा मोर, लाल जंगली मुर्गा, जंगली सूअर, चीतल और काकड़ समेत कई अन्य प्रजातियों की मौजूदगी के संकेत भी मिले। यह जानकारी जगाधरी से कांग्रेस विधायक चौ. अकरम खान के विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में वन एवं वन्य जीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने दी। हालांकि जवाब का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ये आंकड़े केवल कलेसर राष्ट्रीय उद्यान या कलेसर वन्यजीव अभयारण्य के नहीं हैं। सरकार के मुताबिक कलेसर राष्ट्रीय उद्यान और कलेसर वन्यजीव अभयारण्य के लिए अलग से कोई वन्यजीव सर्वेक्षण नहीं कराया गया था। उपलब्ध आंकड़े पूरे शिवालिक क्षेत्र में किए गए संकेत सर्वेक्षण के हैं।भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून ने हरियाणा वन विभाग के सहयोग से 28 फरवरी से 7 मार्च 2022 तक शिवालिक क्षेत्र का व्यापक वन्यजीव सर्वेक्षण किया था। इसमें अलग-अलग स्थानों पर कैमरा ट्रैपिंग के साथ वन्यजीवों के पगमार्क, खुर के निशान, मल और पेलेट्स जैसे संकेतों को दर्ज किया गया। इस सर्वेक्षण में तेंदुए के 76 संकेत मिले, जो सभी दर्ज प्रजातियों में सबसे अधिक थे। इसके बाद सांभर और नीलगाय के 60-60 संकेत दर्ज किए गए। मोर के 49, लाल जंगली मुर्गे के 42, जंगली सूअर के 29, चीतल के 22 और काकड़ यानी भौंकने वाले हिरण के 21 संकेत मिले। शिवालिक के जंगल में हिमालयी गोरल के 20, ग्रेलंगूर के 17, खरगोश के 11, साही के नौ, सुनहरे सियार के चार और कलीज तीतर के तीन संकेत भी दर्ज किए गए। इन सभी को मिलाकर वन्यजीव संकेतों की कुल संख्या 423 रही। 423 का आंकड़ा जानवरों की वास्तविक संख्या नहीं है। यह सर्वेक्षण के दौरान मिले संकेतों की संख्या है। इसी तरह तेंदुए के 76 संकेत का अर्थ 76 तेंदुए होना नहीं है। सरकार के जवाब में इसे संकेत सर्वेक्षण के रूप में दर्ज किया गया है।
वन्यजीवों की निगरानी और अवैध शिकार रोकने के लिए सरकार ने वन्यजीव विभाग को 28 कार/जीप और 40 मोटरसाइकिलें आवंटित की हैं। यानी फील्ड मॉनिटरिंग के लिए विभाग को कुल 68 वाहन उपलब्ध कराए गए हैं।
विधानसभा में सामने आए आंकड़ों से इतना जरूर साफ है कि शिवालिक क्षेत्र जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। तेंदुए से लेकर सांभर, नीलगाय, चीतल, काकड़ और हिमालयी गोरल जैसे वन्यजीवों के संकेत मिले हैं। पक्षियों में मोर, लाल जंगली मुर्गा और कलीज तीतर की मौजूदगी दर्ज हुई है, जबकि सुनहरे सियार, साही और खरगोश जैसे वन्यजीवों के संकेत भी सर्वेक्षण में सामने आए।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

