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हिसार : एचएयू के वैज्ञानिकों ने विकसित किया आंकड़ों के विश्लेषण का वेब अनुप्रयोग, कॉपीराइट मिला

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हिसार : एचएयू के वैज्ञानिकों ने विकसित किया आंकड़ों के विश्लेषण का वेब अनुप्रयोग, कॉपीराइट मिला


शोधकर्ताओं को दोहराए गए मापों के आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने में

मिलेगी मदद

हिसार, 09 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) के वैज्ञानिकों

ने अनुसंधान को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

विश्वविद्यालय के गणित एवं सांख्यिकी विभाग के वैज्ञानिकों डॉ. ओपी श्योराण, डॉ. सरिता

रानी, डॉ. विनय कुमार एवं डॉ. मंजू एस. टोंक द्वारा आंकड़ों के विश्लेषण के लिए विकसित

वेब आधारित अनुप्रयोग को कॉपीराइट प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में

अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने शुक्रवार काे इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों को

बधाई देते हुए कहा कि वर्तमान समय में अनुसंधान को डिजिटल तकनीक से जोड़ना आवश्यक है।

आधुनिक शोध में सांख्यिकीय विश्लेषण और कंप्यूटर आधारित उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका

है। ऐसे उपयोगी सॉफ्टवेयर और वेब आधारित अनुप्रयोग शोधकर्ताओं के कार्य को आसान बनाने

के साथ शोध की गुणवत्ता बेहतर करने में भी सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय

का प्रयास है कि वैज्ञानिकों के अनुसंधान का लाभ केवल शोध कार्य तक सीमित न रहे, बल्कि

उसे व्यावहारिक उपयोग के लिए भी विकसित किया जाए। शोध परिणामों को सॉफ्टवेयर, डिजिटल

उपकरणों और अन्य तकनीकी समाधानों में बदलने से उनकी उपयोगिता और पहुंच बढ़ती है। उन्होंने

वैज्ञानिकों से अपने शोध एवं नवाचारों को उपयोगी तकनीकों में विकसित करने के साथ उन्हें

बौद्धिक संपदा के रूप में संरक्षित करने की दिशा में भी निरंतर कार्य करने का आह्वान

किया।

डॉ. ओपी श्योराण ने बताया कि यह वेब आधारित अनुप्रयोग उन शोधकर्ताओं के लिए

उपयोगी है, जिन्हें एक ही विषय से अलग-अलग समय पर प्राप्त आंकड़ों का वैज्ञानिक एवं

सांख्यिकीय विश्लेषण करना होता है। दोहराए गए मापों से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण

की प्रक्रिया सामान्य आंकड़ों से अलग होती है। ऐसे में यह अनुप्रयोग आंकड़ों को व्यवस्थित

तरीके से समझने और उनका वैज्ञानिक विश्लेषण करने में मदद कर सकता है। इससे शोधकर्ता

अपने शोध के आंकड़ों का आसानी से विश्लेषण कर परिणामों को अधिक प्रभावी ढंग से समझ

सकेंगे।

इस अवसर पर ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय

के अधिष्ठाता डॉ. राजेश गेरा, मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. नरेश कौशिक और डॉ. योगेश

जिंदल उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर