हिसार : प्लास्टिक का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक, कम से कम करें उपयोग : प्रो. बीआर कम्बोज
हकृवि में ‘माइक्रोप्लास्टिक
का इंसान और पौधों की हेल्थ पर असर’ विषय पर ब्रेन स्ट्रोरमिंग
सत्र का आयोजन
हिसार, 05 मार्च
(हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय स्थित कृषि महाविद्यालय में बॉटनी और प्लांट फिजियोलॉजी
विभाग की ओर से ‘माइक्रोप्लास्टिक का इंसान और पौधों की हेल्थ पर असर’ विषय पर ब्रेन स्ट्रोरमिंग सत्र का
आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज मुख्यातिथि
रहे। यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया, कनाडा से प्रो. देवकी नंदन विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। कार्यक्रम में
बॉटनी, प्लांट फिजियोलॉजी, एनवायरनमेंटल साइंस, फिशरीज़, एग्रीकल्चर और बायोटेक्नोलॉजी
सहित अलग-अलग विषयों के वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों ने भाग लिया।
कुलपति प्रो. बीआर
कम्बोज ने गुरुवार काे अपने संबोधन में कहा कि प्लास्टिक, इंसान की जिंदगी को आसान बनाने की बजाए
हमारी सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है। माइक्रोप्लास्टिक दो शब्दों से मिलकर
बना है माइक्रो-बेहद छोटा तथा प्लास्टिक यानि कृत्रिम पॉलीमर पदार्थ। पानी की बोतल,
पैकेज्ड फूड और प्लास्टिक बैग में मौजूद सूक्ष्म कण, जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक कहा
जाता है, धीरे-धीरे हमारे शरीर में जमा हो रहे हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का
कारण बन रहे हैं। माइक्रोप्लास्टिक पौधों के विकास को भी काफी हद तक प्रभावित करते
हैं जिससे मिट्टी के स्वास्थ्य व फसल की पैदावार पर असर पड़ता है। रोजाना यह कण न केवल
खाने और पानी के जरिए शरीर में प्रवेश कर रहे हैं, बल्कि हवा और यहां तक कि नमक में
भी मौजूद हैं। माइक्रोप्लास्टिक्स से बचाव के लिए हम प्लास्टिक की बजाय कांच या स्टेनलेस
स्टील की बोतल का प्रयोग कर सकते हैं। प्लास्टिक के बर्तनों में खाना गर्म करने से
बचें तथा पैकेज्ड भोजन की अपेक्षा ताजा भोजन चुनें। पीने के पानी के लिए उच्च गुणवत्ता
वाले फिल्टर लगाएं। कुलपति ने कहा कि माइक्रोप्लास्टिक को कम करने के लिए शोधकर्ताओं
और नीति निर्धारकों को मिलकर काम करने की जरूतर है। जैसे-जैसे हम भविष्य की ओर देखते
हैं, हमें जागरूकता से आगे बढक़र एक्शन लेने लायक, साइंस-बेस्ड ज्ञान को लागू करना होगा।
डॉ. देवकी नंदन
ने पौधों की जड़ों के साथ माइक्रोप्लास्टिक के इंटरैक्शन, पौधों के टिशू के अंदर उनके
ट्रांसलोकेशन और फसल की प्रोडक्टिविटी और फूड चेन ट्रांसफर पर इसके संभावित असर के
बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बायोलॉजिकल सैंपल में माइक्रोप्लास्टिक का पता
लगाने के लिए एडवांस्ड एनालिटिकल टेक्नीक पर भी चर्चा की और इस ग्लोबल एनवायरनमेंटल
चुनौती से निपटने के लिए भारत और कनाडा के बीच इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च कोलेबोरेशन के
महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम में आस्ट्रेलिया से एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन ऑफिसर राजेश
जलोटा ने ऑनलाइन माध्यम से अपने विचार रखे।
मौलिक विज्ञान एवं
मानविकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश गेरा ने कार्यक्रम में सभी का स्वागत किया।
डॉ. विनोद गोयल ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी के डॉ. प्रियदर्शन
हरि और डॉ. राजेश जलोटा सहित कार्यक्रम में आए सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर
विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता निदेशक, अधिकारी व वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

