home page

हरियाणा के चार विश्वविद्यालयाें में भ्रष्टाचार की जांच शुरू

 | 

-तीन माैजूदा व एक पूर्व वीसी के खिलाफ आई शिकायतों पर कार्रवाई

चंडीगढ़, 02 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने चार विश्वविद्यालयों के तीन मौजूदा व एक पूर्व कुलपति के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं। विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार, भर्तियों में गड़बड़ी और नियमों के अनुपालन में कोताही के आरोप में राज्य सरकार ने आंतरिक जांच आरंभ कर दी है। राज्य सरकार को आरोपों के मजबूत दस्तावेज और प्रमाण मिले तो जांच का दायरा बढ़ाकर इसे स्टेट विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो के पास भेजा जा सकता है।

हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक अरशिंद्र सिंह चावला ने विश्वविद्यालयों में कुलपतियों के विरुद्ध आई शिकायतों की राज्य सरकार के स्तर पर जांच होने की पुष्टि की है, लेकिन इस बात से इनकार किया है कि एंटी करप्शन ब्यूरो के स्तर पर जांच हो रही है। राज्य में यह पहला मौका है, जब एक साथ प्रदेश के चार विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच राज्य सरकार के स्तर पर चल रही है। राज्य सरकार की जांच के दायरे में रोहतक स्थित महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, हिसार स्थित गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम यूनिवर्सिटी आफ साइंस एंड टेक्नोलाजी और कुरुक्षेत्र स्थित श्रीकृष्णा आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी शामिल हैं।

महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक के पूर्व कुलपति डा. राजबीर सिंह पर आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान करीब 20 हजार पौधों की खरीद में गड़बड़ी और नियुक्तियों में अधिकार का गलत इस्तेमाल किया गया है। उनके विरुद्ध विश्वविद्यालय में विभिन्न कारणों के चलते बड़े आंदोलन भी चले। अपनी राजनीतिक पहुंच के चलते वह इनेलो, कांग्रेस और भाजपा तीनों सरकारों में लाबीइंग करने में कामयाब रहे।

गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी हिसार में कुलपति प्रोफेसर नरसी राम पर भर्तियों में गड़बड़ी के बड़े पैमाने पर आरोप हैं। खासकर नान-टीचिंग स्टाफ से जुड़ी भर्तियों में उनकी कार्यप्रणाली पर अंगुली उठ रही है। मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम यूनिवर्सिटी आफ साइंस एंड टेक्नोलाजी में स्टूडेंट फंड से लगभग 50 करोड़ रुपये के गबन से जुड़ी शिकायत राज्य सरकार के पास पहुंची है। फंड का फिक्स्ड डिपाजिट ज्यादा रिटर्न देने वाले सरकारी बैंक में रखने की बजाय दो साल के लिए कम ब्याज दर पर प्राइवेट बैंक में करवाया गया, जिससे काफी वित्तीय नुकसान हुआ। यह शिकायत एक छात्र की तरफ से की गई थी। एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने पहले ही इस मामले की जांच कर ली थी और यूनिवर्सिटी प्रशासन को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। कुरुक्षेत्र स्थित श्रीकृष्णा आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी के कुलपति पर नियमों की अनदेखी कर नियुक्तियां करने का आरोप है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा