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सिरसा: नामधारी समाज का इतिहास त्याग, बलिदान और संघर्ष से भरा हुआ : जेपी नड्डा

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सिरसा: नामधारी समाज का इतिहास त्याग, बलिदान और संघर्ष से भरा हुआ : जेपी नड्डा


सिरसा, 06 मार्च (हि.स.)। केंद्रीय कैबिनेट मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा है कि नामधारी समाज की परंपराएं देशभक्ति, सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक मूल्यों का अद्भुत संगम हैं। नामधारी समाज का इतिहास त्याग, बलिदान और संघर्ष से भरा हुआ है और यह भारत के गौरवशाली इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जेपी नड्डा ने शुक्रवार को सिरसा जिले के गांव मस्तानगढ़ में आयोजित होला महल्ला पर्व कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्हाेंने कहा कि सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह ने होली के पर्व को एक नई परंपरा के रूप में ‘होला मोहल्ला’ के रूप में स्थापित किया था। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि वीरता, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नामधारी समाज ने सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। गौ-वध के विरोध, शिक्षा के प्रसार, नशा मुक्ति अभियान और समाज सेवा के कार्यों में इस समाज की भूमिका सराहनीय रही है। कोरोना महामारी, भूकंप, बाढ़ और अन्य आपदाओं के समय भी नामधारी समाज ने आगे बढकऱ सेवा कार्य किए हैं।

केंद्रीय कैबिनेट मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने सिख इतिहास के वीर बालकों की स्मृति में हर वर्ष वीर बाल दिवस मनाने का निर्णय लिया है, ताकि उनके साहस और बलिदान को आने वाली पीढिय़ां याद रखें। उन्होंने नामधारी समुदाय के सतगुरु उदय सिंह जी को नमन करते हुए सभी श्रद्धालुओं को पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और देश में एकता, सद्भावना तथा आध्यात्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सिख समाज के सम्मान और उनके योगदान को मुख्यधारा में लाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

सतगुरु उदय सिंह जी ने कहा कि गुरु व अवतार किसी एक समुदाय के नहीं होते, बल्कि पूरे संसार के लिए होते हैं। उन्होंने कहा कि सतगुरु राम सिंह जी का सबसे बड़ा योगदान महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए रहा। उस समय समाज में कन्या हत्या जैसी कुरीतियां प्रचलित थीं और बच्चियों को जन्म लेते ही मार दिया जाता था या उन्हें पैसों के लिए बेच दिया जाता था। सतगुरु राम सिंह जी ने ऐसे कृत्यों का कड़ा विरोध करते हुए स्पष्ट कहा था कि जो व्यक्ति बच्ची को मारेगा या बेचेगा, उसे संगत में स्थान नहीं दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उस दौर में विधवाओं को समाज में बेहद कठिन और अपमानजनक जीवन जीना पड़ता था। इस कुरीति को समाप्त करने के लिए सतगुरु राम सिंह जी ने विधवा विवाह की परंपरा को फिर से शुरू किया और महिलाओं को सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिलाया। उन्होंने महिलाओं को अमृत पान कराने की भी परंपरा शुरू की, जिससे उन्हें पुरुषों के समान धार्मिक अधिकार मिले। कार्यक्रम को हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने भी संबोधित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / Dinesh Chand Sharma