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चीन के तिब्बत कानून के खिलाफ ब्लैक हैट मार्च पानीपत पहुंचा

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चीन के तिब्बत कानून के खिलाफ ब्लैक हैट मार्च पानीपत पहुंचा


-एबीवीपी ने यात्रा प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए लगाया वंदे मातरम् का नारापानीपत, 19 अप्रैल (हि.स.)। चीन के नए ‘जातीय एकता और प्रगति संवर्धन कानून’ के विरोध में तिब्बती युवा कांग्रेस द्वारा शुरू की गई ‘ब्लैक हैट’ पैदल यात्रा पानीपत पहुंच गई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने यात्रा प्रतिभागियों का भव्य स्वागत किया।

इस अवसर पर निर्वासित तिब्बती संसद के पूर्व डिप्टी स्पीकर आचार्य येशी फुंटसोक ने कहा कि इस पैदल यात्रा का उद्देश्य चाइना द्वारा तिब्बत में लाए गए नए कानून जातीय एकता और प्रगति संवर्धन का विरोध करना है। क्योंकि इस कानून से तिब्बती संस्कृति खत्म हो जाएगी उन्होंने कहा कि यह कानून तिब्बतियों के मौलिक पहचान व अधिकारों से पूर्णतः वंचित कर देगी। यात्रा की अगुआई कर रहे तिब्बती युवा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष त्सेरिंग चोम्फेल ने कहा कि हमें अपने देश तिब्बत को चीन से आजाद कराने के लिए 70 साल से अधिक समय से लड़ाई लड़ रहे हैं और हम अपने देश को आजाद कराकर ही दम लेंगे चाहे हमें कितनी ही कुर्बानियां देनी पड़े। उन्होंने कहा कि दस लाख से अधिक तिब्बतियों को मनगढंत राजनीतिक आरोपों के तहत गिरफ्तार कर जेल में डाला गया और उनका नरसंहार किया गया। वर्तमान में, चीन की 'चीनीकरण की नीति के माध्यम से ज़बरदस्ती आत्मसातीकरण को आक्रामक रूप से बढ़ाया जा रहा है। हाल ही में पारित तथाकथित जातीय एकता और प्रगति संवर्धन कानून तिब्बती पहचान को मिटाने की एक और सोची-समझी साजिश है। 'ब्लैक हैट मार्च इन्हीं गंभीर अन्यायों के खिलाफ प्रतिरोध का एक शक्तिशाली प्रतीक है। तिब्बती युवा कॉन्ग्रेस के उपाध्यक्ष ताशी तारग्याल ने कहा कि तिब्बत एक प्राचीन सभ्यता और एक अनोखा राष्ट्र है, जो अपनी भौगोलिक संरचना के कारण अपने सभी पड़ोसियों से मौलिक रूप से भिन्न रहा है। विशाल और बर्फीले पहाड़ों से घिरा होने के कारण इसे दुनिया का तीसरा ध्रुव और दुनिया की छत कहा जाता है। इस पदयात्रा में 20 साल से लेकर 80 साल तक की सैकड़ों महिला पुरुषों ने भाग लिया तथा प्रेस वार्ता के बाद सभी ने एक स्वर में वंदे मातरम् का गान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल वर्मा