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हिसार : सरकार का हस्तक्षेप केवल अस्थायी राहत, स्थायी समाधान के लिए पारदर्शी कार्रवाई जरूरी : संपत सिंह

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हिसार : सरकार का हस्तक्षेप केवल अस्थायी राहत, स्थायी समाधान के लिए पारदर्शी कार्रवाई जरूरी : संपत सिंह


इलेवन पावर को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के मामले में सरकार की भूमिका

पर उठाए सवाल

बिजली व्यवस्था को निजी व्यावसायिक हितों की भेंट नहीं चढ़ने देंगे

हिसार, 01 नवंबर (हि.स.)। इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व मंत्री प्रो.

संपत सिंह ने रविवार काे जारी बयान में कहा कि गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर बिजली

वितरण लाइसेंस दिए जाने के विवादित मामले में भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल

उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के हालिया हस्तक्षेप से भले ही फिलहाल संकट टल गया

हो, लेकिन इस पूरे मामले से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले हैं।

प्रो. संपत सिंह ने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि विद्युत अधिनियम की

धारा 108 के तहत जारी किए गए निर्देशों को क्या सरकारी कार्य संचालन नियमों के अनुसार

मंत्रिपरिषद की औपचारिक मंजूरी प्राप्त थी? क्या सरकार ने इस मामले में निर्धारित संवैधानिक

एवं प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया है या केवल मुख्यमंत्री के आश्वासनों के आधार

पर ही कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने 19 अक्टूबर,

2026 को इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 वर्षों के लिए बिजली वितरण लाइसेंस प्रदान

किया था। इस निर्णय के बाद प्रदेशभर में विरोध शुरू हो गया। करीब 40 हजार बिजली इंजीनियरों

और कर्मचारियों की हड़ताल के चलते बिजली सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित होने की स्थिति

में पहुंच गईं। इससे लाखों उपभोक्ताओं को परेशानी हुई, औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हुआ

और जलापूर्ति व्यवस्था पर भी संकट मंडराने लगा। प्रदेश में बिजली संकट गहराने की आशंका

पैदा हो गई थी।

प्रो. सिंह ने कहा कि उन्होंने समय रहते सरकार को इस संकट से निपटने के लिए

महत्वपूर्ण सुझाव दिया था। उनके अनुसार, उन्होंने सरकार को सलाह दी थी कि विद्युत अधिनियम

की धारा 94 के तहत लंबी और समय लेने वाली पुनर्विचार प्रक्रिया में उलझने के बजाय जनहित

को ध्यान में रखते हुए तत्काल धारा 108 के तहत नीतिगत निर्देश जारी किए जाएं। सरकार

ने इस सुझाव पर कार्रवाई की और एचईआरसी ने 28 अक्टूबर को आदेश जारी कर दिया कि सरकार

के निर्देश प्रभावी रहने तक लाइसेंस से संबंधित आगामी कार्यवाही स्थगित रहेगी। प्रो. संपत सिंह ने एचईआरसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि

आयोग ने विद्युत अधिनियम की धारा 86(2) के तहत प्रतिस्पर्धा, निवेश और बिजली वितरण

व्यवस्था के पुनर्गठन जैसे महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर राज्य सरकार को अनिवार्य

रूप से सूचित क्यों नहीं किया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर