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हिसार : राखी गढ़ी के टीले पर मिली हजारों साल पुरानी रसोई, चूल्हे व सिलबट्टे

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हिसार : राखी गढ़ी के टीले पर मिली हजारों साल पुरानी रसोई, चूल्हे व सिलबट्टे


हिसार, 03 जून (हि.स.)। नारनौंद क्षेत्र के गांव

राखी गढ़ी में हड़प्पा कालीन सभ्यता की पांचवे दौर की खुदाई में काफी ऐसे अवशेष मिले

हैं जो उस समय की जीवन शैली के रहस्यों से पर्दा उठा रहे हैं। हजारों साल पुरानी चीजें

आज भी हम वैसे ही प्रयोग में ला रहे हैं जिनका प्रयोग वो लोग करते थे।

टीले नंबर पांच पर खुदाई में कच्ची ईंटों की रसोई

के अवशेष मिले हैं। वहां पर चूल्हा, मिट्टी के बर्तन और सिलबट्टे भी पाए गए हैं। सोने

के मनके सहित काफी ऐसी वस्तुएं मिली हैं जो कि इस बात मोहर लगाती हैं कि वो लोग सबसे

पहले इसी टीले पर आकर बसे होंगे। बाकी टीलों पर खोदाई के दौरान व्यवसाय से संबंधित

काफी चीज मिली है। उस सभ्यता का गांव से ही शहरीकरण हुआ था। यहां पर मिलें सभी अवशेषों

को कार्बन डेटिंग के भेज दिया गया हैं। वो कितने हजार साल पुराने होंगे उसके बाद एक

नई तस्वीर सामने आने की उम्मीद जताई जा रही हैं।

राखी गढ़ी के टीले नंबर पांच पर शुरू से लेकर

अब तक ज्यादा खुदाई नहीं हो पाई थी। अबकी बार इस टीले को जानने के लिए भारतीय पुरातत्व

सर्वेक्षण उत्खनन शाखा द्वितीय ग्रेटर नोएडा द्वारा यहां पर ट्रेंच लगाकर खुदाई की

गई। खुदाई की शुरुआती दौर में कुछ नहीं मिला लेकिन खुदाई जारी रखी तो कुछ ही गहराई

में कच्ची ईंटों की दीवार सामने आई जब उसके आसपास खुदाई को आगे बढ़ाया तो वहां पर चूल्हे

और सिलबट्टे के अवशेष मिले। साथ में मिट्टी की काफी बर्तन मिले जिनमें हांडी, छिद्र

युक्त जार, एस सेफ जार, टेराकोटा केक, मुष्टिकाएं सहित खाना पकाने में प्रयोग होने

वाले बर्तन शामिल हैं। वह लोग चूल्हे से बनी हुई रोटी और सिलबट्टे पर चटनी बनाकर खाते

थे। छिद्र युक्त बर्तन का प्रयोग अलग अलग कामों के किया जाता था। इसमें फल रखे जाते

होंगे जो ज्यादा समय तक सुरक्षित रह सके। सब्जी या अन्य खाने वाले अनाजों को इसमें

डालकर पानी से साफ किया जाता होगा। इन सभी विषयों पर अध्ययन किया जा रहा हैं।

कार्बन डेंटिंग से लगेगा पता

मिट्टी के बर्तनों में छिद्र रहते हैं। जब हम

खाना बनाते हैं या उन बर्तनों में खाना रखते हैं तो उस बर्तन में खाने में प्रयोग की

जाने वाली वस्तु की लेयर बन जाती। पानी से साफ करने पर भी उसका कुछ अंश छिद्रों में

रहता हैं वो घुलता नहीं। कार्बन डेटिंग से खाने का भी और वो बर्तन कितने पुराने साल

का है वो भी सामने आ जाती हैं। आजकल एक्सआरएफ तकनीकि से भी पता लगाया जा रहा हैं। इस संबंध में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन

शाखा द्वितीय ग्रेटर नोएडा के अधीक्षण पुरातत्वविद मनोज सक्सेना ने बुधवार काे बताया कि टीले नंबर

पांच पर खुदाई के दौरान चूल्हे और सिलबट्टे पाए गए हैं। कार्बन डेटिंग के लिए भेज दिए

गए हैं। उनसे पता चलेगा कि यह कितने हजार वर्ष पुराने हैं। उत्तर से पश्चिम और दक्षिण

से पूर्व दिशा में कच्ची ईटों की दीवार भी पाई गई है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर