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‘बॉस’ के फर्जी मैसेज पर ट्रांसफर हुए एक करोड़, 1930 की तत्परता से जालसाजों तक पहुंचने बची रकम

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फर्जी व्हाट्सऐप नंबर से ज्वेलरी शोरूम कर्मचारियों को भेजा मालिक का नाम-फोटो,

आरटीजीएस से करवा दिया भुगतान

डीजीपी अजय सिंघल ने 1930 बैंक फॉलो-अप टीम को दी बधाई, कहा—साइबर फ्रॉड में समय

सबसे महत्वपूर्ण

चंडीगढ़, 16 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा पुलिस की साइबर क्राइम हेल्पलाइन

1930 की त्वरित कार्रवाई से करनाल में एक करोड़ रुपये की साइबर ठगी की पूरी राशि जालसाजों

के हाथों में जाने से बच गई। साइबर अपराधियों ने ‘बॉस स्कैम’ का इस्तेमाल करते हुए

करनाल के एक ज्वेलरी शोरूम के कर्मचारियों को शोरूम मालिक के नाम और फोटो वाले फर्जी

व्हाट्सऐप नंबर से संदेश भेजा और एक बैंक खाते में एक करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के

निर्देश दिए। कर्मचारियों ने संदेश को वास्तविक समझकर आरटीजीएस के माध्यम से रकम ट्रांसफर

कर दी। फर्जीवाड़े का पता चलते ही पीड़ित पक्ष ने तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

इसके बाद बैंक फॉलो-अप टीम ने संबंधित बैंकिंग चैनल के साथ तत्काल समन्वय कर कार्रवाई

शुरू की और पूरी रकम सुरक्षित करा ली।

पुलिस अधीक्षक साइबर मयंक गुप्ता के अनुसार, 15 सितंबर 2026 को शाम 7:48 बजे

ममता बंसल, सेक्टर-13, करनाल ने 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता और उनके पति

विकास का करनाल के नेहरू प्लेस में ज्वेलरी शोरूम है। कर्मचारियों को एक व्हाट्सऐप

नंबर से संदेश मिला, जिस पर शोरूम मालिक विकास का नाम और फोटो लगी हुई थी। संदेश में

एक बैंक खाते में एक करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। नाम और फोटो देखकर

कर्मचारियों ने संदेश को वास्तविक मान लिया और आरटीजीएस के जरिए रकम भेज दी।

शाम करीब 5:56 बजे ममता बंसल को बैंक खाते से एक करोड़ रुपये कटने का एसएमएस

मिला। उन्होंने तत्काल शोरूम में फोन कर लेन-देन की जानकारी ली। बातचीत में सामने आया

कि इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करने का मालिक की ओर से कोई निर्देश नहीं दिया गया था। इसके

बाद स्पष्ट हुआ कि साइबर अपराधियों ने मालिक के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी व्हाट्सऐप

नंबर बनाया था और कर्मचारियों को भ्रमित कर ट्रांजैक्शन कराया।

फ्रॉड का पता चलते ही पीड़ित पक्ष ने बिना देरी किए 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत प्राप्त होते ही हेल्पलाइन की बैंक फॉलो-अप टीम ने संबंधित बैंकिंग चैनल के

साथ समन्वय स्थापित कर तत्काल कार्रवाई शुरू की। टीम की तत्परता और समय पर किए गए बैंक

फॉलो-अप के परिणामस्वरूप एक करोड़ रुपये की शत-प्रतिशत राशि जालसाजों के हाथों में

जाने से बचा ली गई।

हरियाणा पुलिस के डीजीपी अजय सिंघल ने 1930 की बैंक फॉलो-अप टीम की कार्रवाई

और संबंधित बैंकिंग चैनल के साथ प्रभावी समन्वय की सराहना करते हुए पूरी टीम को बधाई

दी। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण है। शुरुआती स्तर

पर की गई कार्रवाई ठगी की राशि को सुरक्षित कराने में महत्वपूर्ण मदद कर सकती है। उन्होंने

आमजन से अपील की कि साइबर फ्रॉड होने पर घबराने या देरी करने के बजाय तत्काल 1930 पर

शिकायत दर्ज कराएं।

‘बॉस स्कैम’ या ‘सीईओ फ्रॉड’ में जालसाज किसी कंपनी,

संस्थान या व्यवसाय के मालिक अथवा वरिष्ठ अधिकारी के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी

व्हाट्सऐप नंबर या प्रोफाइल बनाते हैं। इसके बाद कर्मचारियों को तत्काल पैसा ट्रांसफर

करने के निर्देश दिए जाते हैं। कई मामलों में जल्द भुगतान और गोपनीयता बनाए रखने का

दबाव बनाया जाता है, ताकि कर्मचारी वास्तविक अधिकारी से संपर्क कर निर्देशों का सत्यापन

न कर सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा