home page

हिसार : डेयरी व्यवसाय में सफलता के लिए तकनीकी ज्ञान का विशेष महत्व : एसएस ढ़ाका

 | 
हिसार : डेयरी व्यवसाय में सफलता के लिए तकनीकी ज्ञान का विशेष महत्व : एसएस ढ़ाका


लुवास में कौशल विकास के लिए डेयरी फार्मिंग

पर प्रशिक्षण का शुभारंभ

हिसार, 23 फरवरी (हि.स.)। लाला लाजपत राय पशु

चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन विभाग में अनुसूचित

जाति उप योजना के तहत पशुपालकों के लिए डेयरी फार्मिंग–कौशल विकास के लिए पांच

दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ।

उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलसचिव

डॉ. एसएस ढाका मुख्य अतिथि रहे। इस अवसर पर पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता

एवं विभागाध्यक्ष, पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन विभाग डॉ. मनोज रोज, प्रशिक्षण निदेशक

प्रोफेसर डॉ. सतपाल दहिया, प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. मनोज कुमार वर्मा, डॉ. योगेश बांगड़

एवं डॉ. सोनू कुमारी तथा प्राध्यापक पूनम रतवान, अनिल चित्रा एवं सुनील कुमार भी उपस्थित

रहे।

कुलसचिव डॉ. एसएस ढाका ने साेमवार काे कहा कि यह हमारे लिए बड़े सौभाग्य और गर्व

की बात है कि दूर-दूर से पशुपालक हमारे विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण प्राप्त करने के

लिए आए हैं। उन्होंने पशुपालकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि डेयरी व्यवसाय में

सफलता के लिए तकनीकी ज्ञान का विशेष महत्व है। उन्होंने पशुपालकों से आह्वान किया कि

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए वैज्ञानिक तरीकों को अपने व्यवसाय में

अपनाएं तथा अन्य पशुपालकों को भी इनके प्रति जागरूक करें। साथ ही उन्होंने पशुपालकों

को सामूहिक पशुपालन अपनाने के लिए भी प्रेरित किया।

पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनोज

रोज ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी लुवास के वैज्ञानिकों द्वारा

दी गई तकनीकी जानकारी को अपने पशुपालन व्यवसाय में लागू करके अपने पशुधन से अधिकतम

लाभ अर्जित कर सकते हैं।

प्रशिक्षण निदेशक प्रोफेसर डॉ. सतपाल दहिया ने

बताया कि इस प्रशिक्षण का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की डेयरी पशुओं की नस्ल

सुधार योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण में अनुसूचित

जाति वर्ग के 60 पशुपालक भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पशुपालन

से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों जैसे पशुओं की प्रमुख नस्लें, संतुलित आहार,

पशु आवास प्रबंधन, नवजात पशुओं की देखभाल, नस्ल सुधार का महत्व, प्रजनन प्रबंधन, स्वच्छ

दुग्ध उत्पादन तथा पशुओं के प्रमुख रोगों एवं टीकाकरण से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी

प्रदान की जाएगी। सह-जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. विशाल शर्मा ने बताया

कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पशुपालकों को वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन की नवीनतम

तकनीकों से अवगत कराकर उनकी आय में वृद्धि करना है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर