हिसार : भारतीय नव वर्ष नई शुरुआत, प्रकृति के नवजीवन और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक : प्रो. बीआर कम्बोज
हकृवि में भारतीय नववर्ष 2026 के शुभारंभ पर
महायज्ञ एवं सत्संग आयोजित
हिसार, 19 मार्च (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में भारतीय (स्वदेशी) नववर्ष 2026 के पावन अवसर
पर महायज्ञ एवं सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। छात्र कल्याण निदेशालय द्वारा
स्वदेशी जागरण मंच के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.
बीआर कम्बोज मुख्य अतिथि रहे जबकि आरएसएस के विभाग संघ चालक पवन जिंदल विशिष्ट अतिथि
के तौर पर मौजूद रहे। इस अवसर पर कैंपस स्कूल की निदेशका संतोष कुमारी भी मौजूद
रही।
कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने गुरुवार काे नववर्ष की शुभकामनाएं
देते हुए कहा कि भारतीय नववर्ष परंपरागत रूप से नई शुरुआत, प्रकृति के नवजीवन और सांस्कृतिक
चेतना के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इसके पीछे धार्मिक, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक
कारण हैं। हिन्दू मान्यता के अनुसार, ब्रह्मा ने इसी दिन सृष्टि की रचना की थी। इसलिए
इसे नए युग की शुरुआत माना जाता है। यह दिन सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित विक्रम
संवत का पहला दिन है। यह भारतीय परंपरा का प्रमुख पंचांग है। इस समय वसंत ऋतु होती
है। पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं, फसलें पकने लगती हैं, मौसम सुहावना होता है। इसलिए
यह प्राकृतिक नववर्ष भी माना जाता है। इस दिन से कई महत्वपूर्ण त्योहारों की शुरुआत
होती है, जैसे—नवरात्रि का आरंभ। नया
साल नई ऊर्जा, नए संकल्प और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक है। लोग इस दिन पूजा-पाठ,
दान और सत्संग करते हैं। यह पावन अवसर हम सबको अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति, परंपराओं
और आध्यात्मिक मूल्यों से जोडऩे का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। भगवान श्री गणेश जी के
आशीर्वाद से प्रारंभ हुआ यह महायज्ञ एवं सत्संग हमें सकारात्मक ऊर्जा शांति और नई प्रेरणा
प्रदान करता है। भारतीय नववर्ष केवल एक तिथि नहीं बल्कि यह हमारे जीवन में नवीनता,
आशा और संकल्प एवं संस्कार का प्रतीक है। यह हमें अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने,
समाज तथा राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देता है। कुलपति ने विद्यार्थियों
को कलम एवं पुस्तिका प्रेरणा स्वरूप दी ताकि विद्यार्थी पूरे वर्ष लग्न से अपनी पढ़ाई
को सकारात्मक दिशा प्रदान कर सकें।
पवन जिंदल ने नववर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते
हुए कहा कि यह पर्व हमारी प्राचीन संस्कृति, प्रकृति के साथ सामंजस्य एवं नवचेतना का
प्रतीक है। उन्होंने सभी को अपने जीवन में सदाचार, सेवा, और संस्कारों को अपनाने का
संदेश दिया। महायज्ञ में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने
भाग लेकर आहुति अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान
भजन-कीर्तन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय एवं उत्साहपूर्ण बना
दिया। कार्यक्रम वैदिक मंत्रोच्चार एवं हवन-यज्ञ के साथ हुआ, जिसमें विद्वान आचार्यों
द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर देश एवं समाज की सुख-समृद्धि, शांति और उन्नति की कामना
की गई। इस अवसर छात्र कल्याण निदेशक डॉ. एसके पाहुजा, सह छात्र कल्याण निदेशक डॉ. सुबोध
अग्रवाल व सह प्राध्यापक डॉ. संध्या शर्मा उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

