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हिसार : वर्ष प्रतिपदा भारतीय संस्कृति में नवचेतना, नवसंकल्प और नवसृजन का प्रतीक : प्रो. नरसी राम बिश्नोई

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हिसार : वर्ष प्रतिपदा भारतीय संस्कृति में नवचेतना, नवसंकल्प और नवसृजन का प्रतीक : प्रो. नरसी राम बिश्नोई


गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय में नव संवत्सर

पर मंगल यज्ञ, वृक्षारोपण एवं प्रसादी का आयोजन

हिसार, 19 मार्च (हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान

एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा है कि वर्ष

प्रतिपदा भारतीय संस्कृति में नवचेतना, नवसंकल्प और नवसृजन का प्रतीक है। यह पर्व केवल

पंचांग के अनुसार नववर्ष का प्रारंभ नहीं, बल्कि आत्ममंथन, सकारात्मक परिवर्तन और जीवन

मूल्यों के पुनर्संवर्धन का अवसर भी है।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई भारतीय नववर्ष

वर्ष प्रतिपदा के पावन अवसर पर विश्वविद्यालय के गुरु जम्भेश्वर जी महाराज धार्मिक

अध्ययन संस्थान में आध्यात्मिक मंगल यज्ञ के आयोजन के अवसर पर मुख्य यजमान एवं मुख्य

अतिथि के तौर पर अपना सम्बोधन दे रहे थे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की प्रथम महिला

डा. वंदना बिश्नोई उपस्थित रही। अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विजय कुमार

ने की। आयोजन संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रो. किशनाराम बिश्नोई के कुशल निर्देशन में

सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यज्ञ का विधिवत संयोजन नेकीराम द्वारा किया गया तथा संपूर्ण

कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय सहायक प्रोफेसर डॉ. रामस्वरूप ने कियाा।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने गुरु जम्भेश्वर

जी महाराज के पर्यावरण संरक्षण संबंधी सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, जैव विविधता का संरक्षण तथा

सतत् विकास की भावना अत्यंत आवश्यक हो गई है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों

से आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों को आत्मसात करते हुए समाज और

राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान

अर्जन का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, नैतिकता और सामाजिक चेतना का सशक्त मंच है, जहां

से राष्ट्र की दिशा और दशा निर्धारित होती है।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने विशेष रूप

से यह भी उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय ने पिछले वर्ष शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों

के सामूहिक प्रयासों, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के कारण अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल

की हैं तथा नई ऊंचाइयों को स्पर्श किया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इसी ऊर्जा, उत्साह

और प्रतिबद्धता के साथ विश्वविद्यालय परिवार आने वाले समय में और भी नए आयाम स्थापित

करेगा तथा उत्कृष्टता के नए प्रतिमान गढ़ेगा।

कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने इस अवसर पर कहा कि

नव संवत्सर समय परिवर्तन के साथ हमारी सोच और संस्कारों के नवीनीकरण का अवसर प्रदान

करता है। यह हमें अपनी परंपराओं से जुड़कर आधुनिकता को संतुलित करने की प्रेरणा देता

है। विश्वविद्यालय जैसे ज्ञान के केंद्रों में ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल उत्सव

मनाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में जिम्मेदारी, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और

राष्ट्र निर्माण की चेतना विकसित करना है। यदि हम हर नववर्ष पर एक संकल्प लें और उसे

आचरण में उतारें, तो यही छोटे-छोटे प्रयास एक सशक्त और संस्कारित भारत का निर्माण करेंगे।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समस्त संकायों

के डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, गैर शैक्षणिक पदाधिकारीगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों

की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा को और अधिक बढ़ाया। यज्ञ के उपरांत पर्यावरण

संरक्षण के संकल्प के साथ पौधारोपण किया गया, जो गुरु जम्भेश्वर जी की शिक्षाओं के

अनुरूप प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और संरक्षण का सजीव प्रतीक बना।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर