home page

हिसार : पीओएसएच एक्ट की जानकारी से विद्यार्थी पहचान सकेंगे अनुचित व्यवहार

 | 
हिसार : पीओएसएच एक्ट की जानकारी से विद्यार्थी पहचान सकेंगे अनुचित व्यवहार


विद्यार्थियों व

शोधार्थियों को दी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून की जानकारी

आवाज उठाएं, दृढ़ता से खड़े हों और खुलकर बोलें

: विशेषज्ञ

हिसार, 25 सितंबर (हि.स.)। कक्षा से निकलकर विद्यार्थी

जब इंटर्नशिप, शोध और रोजगार की दुनिया में कदम रखते हैं तो उनके लिए केवल विषयगत ज्ञान

ही नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और सुरक्षित कार्य वातावरण की जानकारी भी जरूरी होती

है। इसी उद्देश्य से गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के महिला

प्रकोष्ठ की ओर से शुक्रवार काे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन

उत्पीड़न की रोकथाम अधिनियम, 2013 यानी पीओएसएच एक्ट पर जागरूकता व्याख्यान आयोजित किया

गया। बियोंड द क्लासरूम: अंडरस्टेंडिंग दा पीओएसएच एक्ट विषय पर आयोजित कार्यक्रम में

250 से अधिक विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने भाग लिया।

दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय से आमंत्रित

वक्ता डॉ. नरेश महिपाल ने पीओएसएच एक्ट के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया

कि किस तरह के आचरण को यौन उत्पीड़न की श्रेणी में माना जा सकता है और ऐसी स्थिति में

शिकायत दर्ज कराने तथा उसके निवारण की निर्धारित प्रक्रिया क्या है। उन्होंने आंतरिक

समिति की भूमिका, संबंधित कानूनी समय-सीमाओं तथा सुरक्षित और गरिमापूर्ण वातावरण बनाए

रखने में व्यक्ति एवं संस्थान की जिम्मेदारियों को भी समझाया।

डॉ. महिपाल ने कहा कि कानून के प्रति जागरूकता

विद्यार्थियों को अनुचित व्यवहार पहचानने और अपनी चिंताओं को उचित माध्यम से सामने

रखने में सक्षम बनाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्पीक अप, स्टेंड अप एंड स्पीक

आउट यानी आवाज उठाएं, दृढ़ता से खड़े हों और खुलकर बोलें का संदेश दिया। उन्होंने कहा

कि जागरूकता, पारस्परिक सम्मान और जिम्मेदार आचरण ही परिसर और भविष्य के कार्यस्थलों

में सुरक्षा, गरिमा एवं समानता की संस्कृति का आधार हैं।

महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्षा प्रो. दीपा मंगला

ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर ऐसा होना चाहिए, जहां प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को सम्मानित

और सुरक्षित महसूस करे तथा बिना संकोच अपनी बात रख सके। उन्होंने विद्यार्थियों से

व्यक्तिगत सीमाओं को समझने और उनका सम्मान करने के साथ-साथ उनके उल्लंघन की स्थिति

में उपलब्ध संस्थागत तंत्र की जानकारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों

और शोधार्थियों के लिए पीओएसएच एक्ट की जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे

कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, परिसर, इंटर्नशिप और अन्य संस्थागत गतिविधियों में लगातार एक-दूसरे

के संपर्क में रहते हैं। कार्यक्रम का समापन महिला प्रकोष्ठ की सदस्य डॉ. तरुणा के

धन्यवाद के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. सुनीता, डॉ. तरुणा और डॉ. मनप्रीत उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर