हरियाणा की जेलों में कर्मचारियाें के 48 फीसदी पद खाली
4948 पद मंजूर, काम कर रहे सिर्फ 2568, 2380 पद खाली
1543 वार्डर और महिला वार्डर की कमी
37 में 34 पुरुष मेडिकल अफसरों के पद खाली
चंडीगढ़, 29 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा की जेलों में सुरक्षा से लेकर बंदियों की निगरानी और स्वास्थ्य सेवाओं स्टाफ की कमी से जूझ रही हैं। जेल महकमे में 4948 पर मंजूर हैं, लेकिन 48 फीसदी पद खाली हैं। वार्डर से लेकर मेडिकल अफसरों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
विधानसभा में मुलाना विधायक पूजा के सवाल पर जेल मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा के जवाब ने जेल विभाग में स्टाफ की कमी की तस्वीर उजागर कर दी। विभाग में स्वीकृत 4948 पदों में से 2380 खाली हैं और महज 2568 कर्मचारी कार्यरत हैं। सबसे बड़ा संकट ग्रुप-सी में है, जहां 2045 पद रिक्त हैं। जेल सुरक्षा की रीढ़ 1543 वार्डर और महिला वार्डर के पद खाली हैं। मेडिकल सेवाओं में 37 में 34 पुरुष मेडिकल अफसर और 18 में 17 महिला मेडिकल अफसरों के पद रिक्त हैं।
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि खाली पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है और संबंधित भर्ती एजेंसियों को पदों के लिए मांग-पत्र भेजे जा चुके हैं। रिक्तियां चरणबद्ध तरीके से जल्द से जल्द भरने की बात कही गई है। लेकिन आंकड़ों की असली तस्वीर यह है कि सबसे ज्यादा कमी ग्रुप-सी में है, जहां 4,322 में से 2,045 पद खाली हैं। इसके बाद ग्रुप-डी में 458 में से 260 पद रिक्त हैं। ग्रुप-ए में भी 98 में से 67 और ग्रुप-बी में 70 में से आठ पद खाली हैं।
जेल विभाग में सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले वार्डर और महिला वार्डर के पदों में भी बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं। विभाग में 3,010 वार्डर के पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 1,583 कर्मचारी कार्यरत हैं। 1,427 पद खाली हैं। इसी तरह 179 महिला वार्डर के स्वीकृत पदों में से केवल 63 पर कर्मचारी हैं और 116 पद रिक्त हैं। हेड वार्डर के 366 पदों में 44 खाली हैं, जबकि महिला हेड वार्डर के 63 पदों में छह रिक्त हैं। यानी सिर्फ वार्डर और महिला वार्डर की बात करें तो 1,543 पद खाली हैं। यह स्थिति जेलों की सुरक्षा, बंदियों की निगरानी और रोजमर्रा की जेल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।
जेलों में बंदियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले मेडिकल स्टाफ की कमी भी जवाब में सामने आई है। विभाग में 37 पुरुष मेडिकल अफसरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन सिर्फ तीन कार्यरत हैं और 34 खाली हैं। इसी तरह 18 महिला मेडिकल अफसरों के पदों में केवल एक कर्मचारी कार्यरत है और 17 पद खाली हैं। इसके अलावा सात डर्मेटोलॉजिस्ट, चार साइकियाट्रिस्ट और दो साइकियाट्रिस्ट/मेडिकल अफसर के पद स्वीकृत होने के बावजूद इनमें एक भी पद भरा हुआ नहीं है। इस तरह जेलों में मेडिकल सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञ पदों पर भी भारी रिक्तियां हैं।
मेडिकल स्टाफ की कमी केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। विभाग में 42 फार्मासिस्ट के पदों में 35 खाली, 20 लैब टेक्नीशियन में 19, 18 रेडियोग्राफर में 17, 18 ईसीजी टेक्नीशियन के सभी 18 पद और 17 महिला नर्सों में 16 पद रिक्त हैं। जेल प्रशासन में केवल सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं ही स्टाफ संकट से जूझ नहीं रही हैं। क्लर्क के 100 स्वीकृत पदों में 46 खाली हैं। असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट जेल के 107 पदों में 57 पद रिक्त हैं, जबकि सब-असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट जेल के 91 पदों में 26 खाली हैं।
इलेक्ट्रिशियन के 23 पदों में 16, कारपेंटर मास्टर के 11 में आठ, लेदर मास्टर के छह में पांच, वीविंग मास्टर के आठ में सात और टेलर मास्टर के आठ में सभी आठ पद खाली हैं। कई अन्य तकनीकी पद भी खाली पड़े हैं। ग्रुप-डी के कुल 458 स्वीकृत पदों में केवल 198 कर्मचारी कार्यरत हैं और 260 पद खाली हैं। इस श्रेणी में स्वीपर के 333 पदों में 230, कुक के 56 में 24 और जमादार के एक पद पर कोई कर्मचारी कार्यरत नहीं है।
जेल मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पहले से चल रही है। 1,039 पुरुष वार्डर और 112 महिला वार्डर की नई भर्ती के लिए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को 24 नवंबर 2025 को रिक्विजिशन भेजी गई थी। फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट पूरा हो चुका है और फिजिकल स्क्रीनिंग टेस्ट आगे होना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

