सोनीपत: वास्तविक जीवन का आधार आध्यात्मिक जागृति: सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज
-जागृति, प्रेम और एकत्व का संदेश
लेकर निरंकारी संत समागम का दूसरा दिन
-चिश्ती फाउंडेशन ने सतगुरु माता
सुदीक्षा जी महाराज को वैश्विक शांति पुरस्कार से सम्मानित किया
सोनीपत, 25 अक्टूबर (हि.स.)। 79वें
वार्षिक निरंकारी संत समागम के दूसरे दिन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने श्रद्धालुओं
को जागृति, प्रेम, विनम्रता और एकत्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जागरूकता केवल
बाहरी सजगता तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारों, व्यवहार और भावनाओं में भी चेतन रहना
जरूरी है। चार दिवसीय समागम में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल हुए। अलग-अलग भाषाओं
और संस्कृतियों के लोगों की उपस्थिति ने आपसी प्रेम, सद्भाव और विश्वबंधुत्व का संदेश
दिया।
समालखा-
गन्नौर के मध्य हल्दाना बोर्डर स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल के मैदानों में
देश-विदेश से आए लाखों धर्म प्रेमियों को संबोधित करते हुए धर्म सतगुरु माता सुदीक्षा
जी महाराज ने कहा कि सच्ची भक्ति किसी बाहरी पहचान पर निर्भर नहीं करती, बल्कि प्रेम,
विनम्रता, सहनशीलता और सत्य को जीवन में अपनाने से सार्थक होती है। समय के साथ जीवनशैली
में बदलाव स्वीकार करें, सत्य को हमेशा आधार बनाए रखें। सत्संग का वास्तविक लाभ तभी
मिलता है, जब वहां मिली शिक्षाओं को अपने व्यवहार में उतारा जाए और आत्मसुधार का प्रयास
लगातार जारी रहे।
इससे
पहले निरंकारी राजपिता रमित जी ने दृष्टिहीन व्यक्ति और लालटेन का उदाहरण देकर समझाया
कि केवल गुरमुख का बाहरी स्वरूप धारण करना पर्याप्त नहीं है। जीवन में ब्रह्मज्ञान,
प्रेम और समर्पण का प्रकाश भी होना चाहिए। सेवा, सुमिरन और सत्संग के माध्यम से विचारों,
भावनाओं और आचरण को बेहतर बनाना ही सच्ची आध्यात्मिक जागृति है। इस अवसर पर चिश्ती
फाउंडेशन ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज को वैश्विक शांति पुरस्कार से सम्मानित
किया।
समागम
में लगी निरंकारी प्रदर्शनी भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। आधुनिक
तकनीक, प्रकाश व्यवस्था और रचनात्मक प्रस्तुतियों से सुसज्जित इस प्रदर्शनी को तीन
भागों में बांटा गया है। इनमें मुख्य प्रदर्शनी, बाल प्रदर्शनी और संत निरंकारी चैरिटेबल
फाउंडेशन की प्रदर्शनी शामिल हैं। मुख्य
प्रदर्शनी में मिशन के इतिहास, आध्यात्मिक यात्रा और सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज
तथा निरंकारी राजपिता जी की मानव कल्याण यात्राओं को दर्शाया गया है। तीन विशेष स्वरुपों
के माध्यम से समागम के मुख्य विषय जागृति को प्रस्तुत कर आत्मचिंतन, आध्यात्मिक समझ
और सकारात्मक जीवन-दृष्टि अपनाने की प्रेरणा दी गई है। बाल प्रदर्शनी में बच्चों के
मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास पर जोर दिया गया है। रोचक प्रस्तुतियों के माध्यम
से अच्छे संस्कारों, नैतिक मूल्यों और जीवनोपयोगी शिक्षाओं का संदेश दिया गया है। वहीं,
संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन की प्रदर्शनी में रक्तदान, स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक
जागरूकता और सादे व सामूहिक विवाह जैसे प्रयासों की जानकारी दी गई है। इसके माध्यम
से निस्वार्थ सेवा, मानवता और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा दी जा रही
है।
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हिन्दुस्थान समाचार / नरेंद्र शर्मा परवाना

