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जींद: सोमवती अमावस्या पर पिंडतारक तीर्थ में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, हजारों ने किया पिंडदान

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जींद: सोमवती अमावस्या पर पिंडतारक तीर्थ में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, हजारों ने किया पिंडदान


जींद: सोमवती अमावस्या पर पिंडतारक तीर्थ में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, हजारों ने किया पिंडदान


जींद, 15 जून (हि.स.)। हरियाणा के ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ (पांडु पिंडारा) में सोमवार को ज्येष्ठ मास की सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान देश के विभिन्न प्रांतों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान व तर्पण कर मोक्ष की कामना की।

ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर रविवार को शाम से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। रविवार की पूरा रात धर्मशालाओं में सत्संग तथा कीर्तन आदि का आयोजन चलता रहा। सोमवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान तथा पिंडदान शुरू कर दिया जो मध्यान्ह के बाद तक चलता रहा। इस मौके पर दूर दराज से आएं श्रद्धालुओं ने अपने पितरोंं की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया तथा सूर्यदेव को जलार्पण करके सुख समृद्धि की कामना की।

पिंडारा तीर्थ पर सोमवती अमवस्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने जमकर खरीददारी की। तीर्थ पर जगह-जगह लोगों ने सामान बेचने के लिए फड़े लगाई हुई थी। जिस पर बच्चों तथा महिलाओं ने खरीददारी की। बच्चों ने जहां अपने लिए खिलौने खरीदे तो वहीं बड़ों ने भी घर के लिए सामान खरीदा।

जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि साल की पहली सोमवती अमावस्या सोमवार को ज्येष्ठ (अधिक मास की अमावस्या) पर पड़ी है। सोमवार के दिन अमावस्या होने के कारण इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया। वहीं इस दिन मृगशिरा नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग रहे। जो शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण रहा है। ये दोनों योग पूजा, पाठ, ध्यान, साधना, दान व पुण्य और धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माने जाते हैं।

पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किंवदंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालु आते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा