हिसार : मंत्री के नाम पर साइबर ठगी का खेल बेनकाब, पुलिस ने राजस्थान से दबोचे दो आरोपी
फर्जी सिम से अधिकारियों व नेताओं को किए कॉल, फर्जी दस्तावेजों
से जारी कराई सिम
ट्रूकॉलर पर भी दिखता था मंत्री का नाम, व्हाट्सएप
डीपी पर मंत्री के साथ फोटो लगाकर जीतते थे भरोसा
हिसार, 24 जुलाई (हि.स.)। हरियाणा के लोक निर्माण
एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा के नाम का इस्तेमाल कर साइबर ठगी
का एक सुनियोजित खेल सामने आया है। ठगों ने मंत्री के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार
कर मोबाइल सिम जारी करवाई, ट्रूकॉलर पर मंत्री का नाम प्रदर्शित कराया और व्हाट्सएप
डीपी पर मंत्री के साथ फोटो लगाकर अधिकारियों व भाजपा नेताओं को फोन कर अपना प्रभाव
जमाने की कोशिश की। मामले का खुलासा होने पर हिसार साइबर थाना पुलिस और सीआईए की संयुक्त
टीम ने राजस्थान के अलवर जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जांच के अनुसार आरोपियों ने सबसे पहले एक
सरकारी अधिकारी को फोन कर कहा कि मंत्रीजी की तरफ से अपने आदमी को भेज रहा हूं,
उसका काम कर देना। इसके बाद पानीपत और करनाल के भाजपा जिला अध्यक्षों से संपर्क
किया गया। करनाल भाजपा जिलाध्यक्ष को कॉल कर खुद को मंत्री रणबीर गंगवा का निजी सहायक
(पीए) बताते हुए फर्नीचर बेचने के नाम पर 75 हजार रुपये देने की बात कही गई।
बातचीत के दौरान नेताओं को संदेह हुआ तो उन्होंने
सीधे मंत्री रणबीर गंगवा से संपर्क कर पूरे मामले की पुष्टि की। मामला फर्जी निकलते
ही हिसार पुलिस को शिकायत दी गई, जिसके बाद साइबर थाना और सीआईए ने तकनीकी जांच शुरू
की।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने
मंत्री रणबीर गंगवा के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर मोबाइल सिम जारी करवाई थी। इतना
ही नहीं, ट्रूकॉलर पर भी उसी नंबर के साथ मंत्री का नाम दिखाई देता था, जिससे लोगों
का विश्वास आसानी से जीता जा सके।
पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि आरोपियों ने अपने
व्हाट्सएप प्रोफाइल पर मंत्री रणबीर गंगवा के साथ सार्वजनिक कार्यक्रम की फोटो लगा
रखी थी। इस फोटो का इस्तेमाल वे अपनी पहचान को विश्वसनीय दिखाने और लोगों को झांसे
में लेने के लिए कर रहे थे।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने राजस्थान
के अलवर जिले के नाडका गांव में दबिश देकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अब
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, सिम किस रिटेलर
या एजेंसी से जारी हुई और इस पूरे साइबर नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह केवल किसी
व्यक्ति के नाम पर फर्जी कॉल करने का मामला नहीं, बल्कि सरकारी पद और जनप्रतिनिधि की
पहचान का दुरुपयोग कर विश्वास हासिल करने तथा संगठित साइबर ठगी को अंजाम देने की साजिश
है। मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां
होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

