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हिसार के गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय एवं दत्तोपंत ठेंगड़ी फाउंडेशन, नई दिल्ली के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

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हिसार के गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय एवं दत्तोपंत ठेंगड़ी फाउंडेशन, नई दिल्ली के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर


नए अवसर प्राप्त होंगे, राष्ट्रीय विकास से जुड़े

महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक कार्य किया जा सकेगा: प्रो. नरसी राम बिश्नोई

हिसार, 18 मार्च (हि.स.)। हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय एवं दत्तोपंत ठेंगड़ी फाउंडेशन, नई दिल्ली के

बीच शैक्षणिक एवं पेशेवर सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता

ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते का उद्देश्य प्रख्यात विचारक स्व.

श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी के विचारों एवं सिद्धांतों को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय विकास

की दिशा में शैक्षणिक और शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय

की ओर से कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई व दत्तोपंत ठेंगड़ी फाउंडेशन की ओर से चेयरपर्सन

विरजेश उपाध्याय ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई

ने बुधवार काे कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय और समाज के बीच ज्ञान, शोध और नीति विमर्श के क्षेत्र

में मजबूत सहयोग स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से विद्यार्थियों

और शोधार्थियों को नए अवसर प्राप्त होंगे तथा राष्ट्रीय विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों

पर सार्थक कार्य किया जा सकेगा। फैकल्टी विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत पोस्ट-डॉक्टोरल

फेलोशिप की शुरुआत भी की जाएगी, जिससे श्रम, कृषि एवं सामुदायिक विकास जैसे विषयों

पर उन्नत शोध को बढ़ावा मिलेगा। दोनों संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर अर्थशास्त्र, सामाजिक

एवं नीतिगत विषयों पर संयुक्त शोध एवं मूल्यांकन अध्ययन भी करेंगे।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने

कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और शोध कार्यों को नई दिशा देगा तथा विद्यार्थियों

और शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान एवं कौशल के आदान-प्रदान के बेहतर अवसर उपलब्ध

कराएगा।

डीन इंटरनेशनल अफेयर्स प्रो. ओपी सांगवान ने

बताया कि इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर कई महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित करेंगे।

इनमें श्रम अर्थशास्त्र, ग्रामीण विकास तथा स्वदेशी आर्थिक विचारधारा से संबंधित पुस्तकों,

जर्नलों और ई-बुक्स के साथ एक विशेष पुस्तकालय की स्थापना शामिल है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय

में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर वैल्यू-एडेड पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिनमें

स्वदेशी अर्थशास्त्र, श्रम संबंध, विकेन्द्रीकृत नीतियां तथा समकालीन नीति विषयों को

शामिल किया जाएगा।

समझौते के तहत छात्रों के कौशल विकास के लिए

विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार, सम्मेलन तथा शैक्षणिक चर्चाएं आयोजित

की जाएंगी। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप, सेमेस्टर इंटर्नशिप

तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण के अवसर भी प्रदान किए जाएंगे।

इस अवसर पर अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ.

अश्वनी तथा एसोसिएट डीन डॉ. प्रियंका भी उपस्थित रहे। दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों

ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग शिक्षा, शोध और नीति विमर्श के क्षेत्र में नई

संभावनाएं विकसित करेगा और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर