हिसार : सिर्फ एक रुपये में दो बेटों की सगाई, पूर्व सरपंच नरेश पूनिया ने पेश की दहेज मुक्त विवाह की मिसाल
बहू बनकर आने वाली बेटियां ही हमारी सबसे बड़ी दौलत : नरेश पूनिया
शादी में भी नहीं लेंगे दहेज, दोनों बेटे कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ
लेंगे प्रतीकात्मक आठवां फेरा
हिसार, 05 अगस्त (हि.स.)। शादियों में बढ़ते दिखावे और दहेज की होड़
के बीच जिले के गांव सतरोड़ कलां से समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश सामने आया है।
गांव के पूर्व सरपंच नरेश पूनिया ने अपने दोनों बेटों की रिंग सेरेमनी महज एक रुपये
के शगुन में संपन्न कर दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत संदेश दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने
ऐलान किया कि बेटों की शादी में भी उनका परिवार किसी प्रकार का दहेज स्वीकार नहीं करेगा।
साथ ही दोनों बेटे विवाह के दौरान बेटी बचाओ और कन्या भ्रूण हत्या के विरोध का संदेश
देने के लिए पारंपरिक सात फेरों के साथ प्रतीकात्मक आठवां फेरा भी लेंगे।
हिसार-तोशाम रोड स्थित रॉयल पॉल रिसोर्ट में आयोजित समारोह में पूर्व
सरपंच नरेश पूनिया के पुत्र अजय की रिंग सेरेमनी अंजू तथा विजय की रिंग सेरेमनी स्वीटी
के साथ बेहद सादगीपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। समारोह में किसी प्रकार का दहेज, दिखावा
या अनावश्यक खर्च नहीं किया गया। दोनों परिवारों ने केवल एक रुपये के शगुन के साथ रिश्ते
को स्वीकार कर सामाजिक बदलाव का संदेश दिया।
समारोह के दौरान दोनों नवयुवकों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते
हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने और प्रकृति की रक्षा का आह्वान किया। बड़ी संख्या में
ग्रामीण, रिश्तेदार और शुभचिंतक समारोह में पहुंचे और नवयुगलों को आशीर्वाद दिया। इस
अवसर पर पूर्व सरपंच नरेश पूनिया और उनकी धर्मपत्नी सुशीला देवी भी परिवार के साथ खुशियों
में शामिल हुए।
पूर्व सरपंच नरेश पूनिया ने कहा कि जो बेटियां बहू बनकर हमारे घर
आ रही हैं, वही हमारी सबसे बड़ी पूंजी और सबसे बड़ा सम्मान हैं। इससे बड़ा कोई दहेज
नहीं हो सकता। हमें धन-दौलत नहीं, संस्कार और रिश्तों की गरिमा चाहिए। उन्होंने कहा
कि जिस परिवार ने अपनी बेटी को संस्कार, शिक्षा और अच्छे मूल्यों के साथ बड़ा किया
है, वही सबसे बड़ा सम्मान का अधिकारी है। समाज को बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि सबसे
बड़ी ताकत मानना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि विवाह जैसे पवित्र अवसरों को
फिजूलखर्ची और दहेज से मुक्त बनाकर सादगी के साथ मनाया जाए।
नरेश पूनिया ने बताया कि दोनों बेटों के विवाह की तिथि अभी तय नहीं
हुई है, लेकिन विवाह के दिन दोनों बेटे कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जनजागरण और बेटी
बचाओ अभियान के समर्थन में सात फेरों के साथ एक प्रतीकात्मक आठवां फेरा भी लेंगे। उनका
मानना है कि यदि समाज की सोच बदलेगी, तभी बेटियों को समान सम्मान और सुरक्षित भविष्य
मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि आज जरूरत दहेज जुटाने की नहीं, बल्कि बेटियों को शिक्षित,
आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की है। जब बेटियां आगे बढ़ेंगी, तभी परिवार, समाज और देश
आगे बढ़ेगा।
पूर्व सरपंच नरेश पूनिया की इस पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो
रही है। लोग इसे दहेज मुक्त विवाह, बेटी सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सुधार
की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम बताते हुए अन्य परिवारों के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण
मान रहे हैं।
दोनों परिवारों ने दिया सादगी और संस्कार का संदेश
समारोह में अंजू के पिता एवं गांव बिठमड़ा के पूर्व सरपंच बिंदर
सिंह तथा स्वीटी के पिता शीलू, निवासी भकलाना, अपने-अपने परिवारों के साथ शामिल हुए।
दोनों परिवारों ने नवयुगलों को सुखद दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया और सादगीपूर्ण,
दहेज मुक्त विवाह की इस पहल को समाज के लिए सकारात्मक संदेश बताया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

