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हिसार: हरियाणा के विश्वविद्यालयों को साइबर हमलों से बचाएगा एआई आधारित सुरक्षा मॉडल

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हिसार: हरियाणा के विश्वविद्यालयों को साइबर हमलों से बचाएगा एआई आधारित सुरक्षा मॉडल


गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय को मिला 28 लाख का शोध अनुदान

हिसार, 20 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों

को बढ़ते साइबर हमलों से सुरक्षित बनाने के लिए गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित साइबर रेजिलिएंस फ्रेमवर्क विकसित

किया जाएगा। विश्वविद्यालय के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डेटा साइंस विभाग के इंचार्ज

एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार कौशिक के नेतृत्व में तैयार इस शोध परियोजना

को हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद ने 28 लाख रुपये का राज्य स्तरीय शोध अनुदान स्वीकृत

किया है।

परियोजना के तहत रियल-टाइम साइबर मॉनिटरिंग, थ्रेट डिटेक्शन, रिस्क असेसमेंट

और साइबर हमलों की भविष्यवाणी जैसी सुविधाओं वाला फ्रेमवर्क विकसित होगा। साथ ही रियल-टाइम

साइबर मॉनिटरिंग डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे विश्वविद्यालय अपने डिजिटल नेटवर्क

की गतिविधियों और संभावित खतरों पर नजर रख सकेंगे। विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों

को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए इंटरएक्टिव साइबर अवेयरनेस पोर्टल भी

बनाया जाएगा।

इस मॉडल से साइबर हमले की आशंका का समय रहते पता लगाकर डेटा चोरी, नेटवर्क

में सेंध, डिजिटल सिस्टम बाधित होने और संवेदनशील सूचनाओं के दुरुपयोग के जोखिम को

कम करने में मदद मिलेगी। मॉडल को भविष्य में हरियाणा के अन्य विश्वविद्यालयों व कॉलेजों

तथा देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भी लागू किए जाने की संभावनाएं हैं। परियोजना

से एआई, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में विद्यार्थियों व शोधार्थियों

को अत्याधुनिक तकनीक पर काम करने का अवसर भी मिलेगा।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने गुरुवार काे कहा कि 28 लाख रुपये का शोध अनुदान विश्वविद्यालय

की बढ़ती शोध क्षमता और नवाचार का प्रमाण है। यह परियोजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020

तथा हरियाणा सरकार के डिजिटल एजुकेशन, साइबर सिक्योरिटी और स्मार्ट कैंपस के विजन को

मजबूती देगी। डॉ. सुनील कुमार कौशिक ने कहा कि डिजिटल तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ

साइबर सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ रही है। परियोजना के माध्यम से ऐसा स्मार्ट और स्केलेबल

एआई मॉडल विकसित करने का प्रयास होगा, जो साइबर खतरों की पहचान के साथ उनके संभावित

प्रभाव का आकलन कर सके। विभागाध्यक्ष प्रो. धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि परियोजना एआई और साइबर सिक्योरिटी

के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के शोध को नई दिशा देगी। परियोजना में डॉ. सुनील कुमार

कौशिक प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, जबकि एनआईटी हमीरपुर के डॉ. कमलेश दत्ता तथा गुजविप्रौवि

के डॉ. नरेंद्र कुमार और डॉ. अभिषेक काजल को-प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर