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हिसार : जीजेयू में शोधार्थियों का अनिश्चितकालीन धरना जारी, प्रशासन से दूसरी वार्ता भी विफल

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हिसार : जीजेयू में शोधार्थियों का अनिश्चितकालीन धरना जारी, प्रशासन से दूसरी वार्ता भी विफल


एक घंटे से अधिक चली बैठक में नहीं बनी सहमति,

अब आश्वासन नहीं, हर मांग पर चाहिए ठोस व लिखित समाधान : शोधार्थी

हिसार, 07 अक्टूबर (हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान

एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में शोधार्थियों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को

लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में शोधार्थी धरने

पर डटे रहे और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। शोधार्थियों का कहना है कि तीन दिन

से धरना देने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान नहीं

किया गया है। उनका आरोप है कि कुलपति या कुलसचिव स्तर का कोई सक्षम अधिकारी उनसे मिलने

तक नहीं पहुंचा है।

शोधार्थियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच

मांगों को लेकर बुधवार को दूसरी बार वार्ता हुई। करीब एक घंटे से अधिक चली बैठक के

बावजूद किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी। शोधार्थियों ने वार्ता के दौरान फीस

वृद्धि, शोधार्थियों पर बढ़ते आर्थिक बोझ, शोध कार्य से जुड़ी समस्याओं और अन्य लंबित

मांगों को प्रमुखता से प्रशासन के सामने रखा।

शोधार्थियों ने कहा कि उनकी समस्याएं लंबे समय

से विश्वविद्यालय प्रशासन के संज्ञान में हैं। कई बार बातचीत और आश्वासन मिलने के बावजूद

धरातल पर कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। वे किसी टकराव के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अपने

अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चुप भी नहीं बैठेंगे।

दूसरी वार्ता भी बेनतीजा रहने के बाद विश्वविद्यालय

प्रशासन की ओर से गुरुवार सुबह 10 बजे दोबारा बैठक बुलाने की बात कही गई है। शोधार्थियों

ने स्पष्ट किया कि अब केवल आश्वासन या मौखिक भरोसा स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रत्येक

मांग पर स्पष्ट निर्णय और ठोस कार्रवाई की अपेक्षा है।

धरने पर बैठे शोधार्थियों ने कहा कि पिछले तीन

दिनों से वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। इसके बावजूद

यदि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेता है तो आंदोलन को और मजबूती के साथ

आगे बढ़ाया जाएगा। शोधार्थियों ने कहा कि तीन दिन से धरना, दो बार वार्ता और फिर भी

समाधान नहीं होना विश्वविद्यालय प्रशासन की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है। शोधार्थियों

ने कहा कि गुरुवार सुबह 10 बजे होने वाली बैठक को वे सकारात्मक उम्मीद के साथ देख रहे

हैं, लेकिन यदि फिर से केवल आश्वासन देकर मामले को टालने का प्रयास किया गया तो उन्हें

आंदोलन आगे बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

धरने पर मौजूद शोधार्थियों ने एकजुट होकर कहा

कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि शोधार्थियों के अधिकार, सम्मान,

आर्थिक सुरक्षा और बेहतर शोध वातावरण के लिए है। उन्होंने कहा कि वे लोकतांत्रिक और

शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं और प्रशासन से भी उम्मीद है कि वह संवेदनशीलता

दिखाते हुए उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगा। शोधार्थियों ने दोहराया कि

गुरुवार सुबह होने वाली बैठक में उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर ठोस और

लिखित समाधान चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर