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हरियाणा के पूर्व मंत्री ने बलात्कार की धारा जोडऩे की अपील का किया विरोध

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चंडीगढ़, 29 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिह ने यूटी चंडीगढ़ के वकील द्वारा दायर उस आवेदन का विरोध किया है जिसमें उनके मामले में धारा 376 (बलात्कार का प्रयास) को शामिल करने के लिए आरोपों में संशोधन की मांग की गई थी, और मामले को ट्रायल के लिए सेशंस कोर्ट में भेजने की मांग की गई थी, क्योंकि यह अपराध विशेष रूप से सेशन कोर्ट द्वारा ही विचारणीय है।

हरियाणा की एक महिला जूनियर कोच ने तत्कालीन खेल मंत्री एवं ओलंपियन संदीप सिंह पर यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाया था। जिसके बाद पुलिस ने 31 दिसंबर, 2022 को महिला कोच की शिकायत पर पूर्व मंत्री के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 354-ए, 354-बी, 342, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज किया था।

चंडीगढ़ पुलिस को दिए अपने बयान में, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि मंत्री ने 1 जुलाई, 2022 को अपने सरकारी आवास पर उसके साथ छेड़छाड़ की, जब उसने विरोध किया तो उसे धक्का दिया, और उसके वहां से भाग निकलने से पहले उसकी टी-शर्ट फाड़ दी।

यूटी के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने पिछली सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ की एक अदालत में यह अर्जी दाखिल की थी। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री, जिसमें सीआरपीसी की धारा 164 के तहत पीडि़ता का बयान और अदालत के समक्ष उसकी मुख्य गवाही शामिल है, में आरोपी के खिलाफ स्पष्ट, सुसंगत और गंभीर आरोप शामिल हैं।

संदीप सिंह के वकील ने आज इस अर्जी का विरोध करते हुए इसे कार्यवाही में देरी करने की एक चाल बताया और यह कायम रखा कि पूर्व ओलंपियन को झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि इस बात का रत्ती भर भी सबूत नहीं है कि मौजूदा मामले में आईपीसी की धारा 511 के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 376 के तहत कोई अपराध बनता है। बचाव पक्ष ने कहा कि शिकायतकर्ता ने अपनी शुरुआती पुलिस शिकायत में ऐसे आरोपों का जिक्रनहीं किया था, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी।

वकील ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता द्वारा दायर की गई इसी तरह की एक अर्जी को पिछली अदालत ने 29 जुलाई, 2024 के आदेश के ज़रिए पहले ही खारिज कर दिया था। इस आदेश को न तो शिकायतकर्ता ने और न ही राज्य ने सेशंस कोर्ट में चुनौती दी थी और इस तरह यह आदेश अब अंतिम रूप ले चुका है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा