रेवाड़ी फैक्ट्री अग्निकांड में मृतकों की एक सप्ताह बाद भी नहीं डीएनए रिपोर्ट
रिपोर्ट आने के बाद होगा अंतिम संस्कार
रेवाड़ी, 30 मई (हि.स.)। रेवाड़ी के बावल औद्योगिक क्षेत्र स्थित जीएलएस फैक्ट्री में हुए भीषण अग्निकांड के बाद लापता श्रमिकों के कंकाल मिलने के मामले में मृतकों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है। परिजनों और शवों से लिए गए डीएनए सैंपल जांच के लिए भेजे जाने के एक सप्ताह बाद भी रिपोर्ट नहीं आई है। ऐसे में मृतकों के स्वजन अपने प्रियजनों के शवों के इंतजार में लगातार अस्पताल और पुलिस अधिकारियों के संपर्क में बने हुए हैं।
जानकारी के अनुसार 25 मई को मृतकों के परिजनों और बरामद कंकालों से डीएनए सैंपल लेकर जांच के लिए करनाल के मधुबन स्थित फॉरेंसिक प्रयोगशाला भेजे गए थे। अधिकारियों को उम्मीद थी कि रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर प्राप्त हो जाएगी, लेकिन शनिवार तक रिपोर्ट नहीं पहुंची। डीएनए मिलान रिपोर्ट आने के बाद ही दोनों शवों की अंतिम रूप से पहचान हो सकेगी और उन्हें अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंपा जाएगा।
गौरतलब है कि 19 मई को जीएलएस फैक्ट्री में अचानक तेज धमाकों के साथ भीषण आग लग गई थी। हादसे में छह श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए थे। इनमें से दो श्रमिकों की हालत बेहद नाजुक थी। गंभीर रूप से घायल हरीबाबू और प्रवेश को उपचार के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान हरीबाबू की मौत हो गई थी। वहीं आग लगने के बाद बिहार के शेखपुरा जिले के केबलबीघा गांव निवासी 26 वर्षीय धर्मेंद्र और नालंदा जिले के मैथी गांव निवासी करीब 50 वर्षीय सतेंद्र पासवान लापता हो गए थे।
हादसे के छह दिन बाद फैक्ट्री परिसर से दोनों के कंकाल बरामद किए गए, जिन्हें नागरिक अस्पताल के शवगृह में सुरक्षित रखवाया गया है। इस बीच पीड़ित परिवारों की शिकायत पर बावल थाना पुलिस ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बावल थाना प्रभारी फूल कुमार ने बताया कि मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट प्राप्त होते ही आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला

