रोहतक: जेठपुर गांव में 10 साल सेवाएं देने वाले शिक्षक हरि ओम वर्मा हुए सेवानिवृत
-जेबीटी शिक्षा हरि ओम वर्मा का कुल कार्यकाल 28 साल 10 महीने 27 दिन का रहा
रोहतक, 01 नवंबर (हि.स.)। शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण और भविष्य को सही आकार देने वाले जेबीटी शिक्षक हरि ओम वर्मा शनिवार 31 अक्टूबर 2026 को कलानौर खंड के गांव जेठपुर स्थित जीएमएस से सेवानिवृत हो गए। विद्यालय के शिक्षकों, गांव के सरपंच, पूर्व सरपंच की ओर से उनका सम्मान किया गया।
वर्ष 1997 से 2026 तक 28 साल 10 महीने 27 दिन की गौरवशाली सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हुए जेबीटी शिक्षा हरि ओम वर्मा का सेवाकाल बेहतरीन रहा। हर विद्यालय में उन्होंने अपनी क्षमता से बढक़र कार्य करते हुए बच्चों का भविष्य गढऩे में कोई कसर नहीं छोड़ी। बतौर शिक्षक उनके जीवन की शुरुआत 05 दिसंबर 1997 को जीपीएस बरोदा, जिला सोनीपत से हुई थी। 21 सितंबर 2016 को उनका तबादला जेठपुर के विद्यालय में हुआ। यहां 10 साल के लंबे अंतराल के बाद वे इसी विद्यालय से सेवानिवृत हुए हैं। ककराना स्कूल प्रिंसिपल एवं वर्तमान डीडीओ जेठपुर सुमनलता, विद्यालय इंचार्ज आशा रानी, टीचर बबीता, क्लर्क निजेश, स्कूल के पूर्व टीचर पीजीटी कृष्ण कुमार, टीजीटी दीपक कुमार, पीआरटी राजेश कुमार, टीजीटी रिटायर्ड दुष्यंत, शशि, सरपंच ममता पत्नी नरेश ने उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। जेठपुर के पूर्व सरपंच विनोद कुमार मेहरा एवं परिवार की ओर से सेवानिवृत हुए हरि ओम वर्मा, उनकी पत्नी नीलम रानी को सम्मानित किया गया। उन्हें सम्मान पत्र व शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया।
इस अवसर पर शिक्षक हरि ओम वर्मा की माता जी कृष्णा देवी, भाई राजबीर वर्मा और जगबीर वर्मा, भाभी अनीता वर्मा, मीना रानी, बेटी रोजी वर्मा और शिवांगनी वर्मा, हरियाणा पुलिस गुरुग्राम में कार्यरत भतीजा मनीष वर्मा, इंडियन बैंक गिद्दड़बाहा में मैनेजर दामाद सोनू वर्मा, समधन निर्मला वर्मा, पूर्व विद्यालय स्टाफ सदस्य उमा सैनी, बिमला देवी, सुरमिला देवी, अश्वनी कुमार, कृष्ण कुमार समेत अनेक लोग मौजूद रहे। पूर्व सरपंच विनोद कुमार ने कहा कि हरि ओम वर्मा जी 10 वर्ष इस विद्यालय को दिए हैं। शिक्षक के रूप में उन्होंने बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया, बल्कि अच्छे संस्कार, ईमानदारी और परिश्रम की सीख दी है। भावुकता भरे शब्दों से हरि ओम वर्मा ने कहा कि 10 साल के कार्यकाल में उन्हें गांव व स्टाफ का हर तरह से सहयोग रहा। परिवार जैसा माहौल हमेशा मिला। उनका सदैव यही प्रयास रहा कि बच्चों को पढ़ाई में ना पिछडऩे दिया जाए।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

