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ईपीएफओ की साख मजबूत करने को बड़े नीतिगत सुधार जरूरी, अधिकारियों की केंद्र से अपील

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- तकनीकी ढांचे, स्टाफ की कमी और विशेषज्ञ नेतृत्व के बिना नहीं सुधरेगी सेवा गुणवत्ता

चंडीगढ़, 06 अगस्त (हि.स.)। कर्मचारी भविष्य निधि अधिकारी संघ (ईपीएफ ऑफिसर्स एसोसिएशन) ने केंद्र सरकार से ईपीएफओ की सार्वजनिक छवि मजबूत करने और करोड़ों अंशधारकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तत्काल नीतिगत सुधार लागू करने की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा है कि देश की लगभग 25 से 35 करोड़ आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईपीएफओ से जुड़ी है, इसलिए इसकी कार्यप्रणाली और सेवा गुणवत्ता राष्ट्रीय महत्व का विषय है।

एसोसिएशन के महासचिव सौरभ स्वामी ने श्रम एवं रोजगार मंत्री तथा केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) के अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय में सदस्य विश्वस्तरीय सेवाएं, त्वरित क्लेम निपटान और प्रभावी शिकायत निवारण की अपेक्षा रखते हैं। इन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए संगठनात्मक कमियों को दूर करना अनिवार्य है।

पत्र में सबसे पहले ईपीएफओ के सूचना सेवा प्रभाग (आईएसडी) में वर्षों से भर्ती नहीं होने पर चिंता जताई गई है। एसोसिएशन के अनुसार वर्ष 2004 के बाद इस महत्वपूर्ण तकनीकी इकाई में प्रत्यक्ष भर्ती नहीं हुई है, जबकि कई वरिष्ठ अधिकारी सेवानिवृत्त या इस्तीफा दे चुके हैं। पूर्णकालिक मुख्य तकनीकी अधिकारी (सीटीओ) का पद भी लंबे समय से खाली है, जिससे तकनीकी परियोजनाओं का संचालन प्रभावित हो रहा है।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि वर्ष 2016-17 के बाद कार्यभार का पुनर्मूल्यांकन नहीं हुआ, जबकि सदस्य संख्या और काम का दायरा लगातार बढ़ा है। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और गुरुग्राम जैसे महानगरों के कार्यालय पुराने स्टाफ मानकों पर काम कर रहे हैं, जिससे शिकायतें और परिचालन दबाव बढ़ रहा है। संगठन ने वैधानिक अधिकारों का उपयोग कर पर्याप्त पद स्वीकृत करने और तकनीकी उन्नयन की मांग की है।

पत्र में कैडर पुनर्गठन में हो रही देरी, विशेषज्ञ नेतृत्व के अभाव और शीर्ष पदों पर बाहरी सामान्य प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि ईपीएफओ जैसे विशेषज्ञ वित्तीय एवं सामाजिक सुरक्षा संस्थान का नेतृत्व विषय विशेषज्ञों के हाथ में होना चाहिए। एसोसिएशन ने सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत ईपीएफ और कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में भी व्यापक सुधार की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि भविष्य निधि का उद्देश्य केवल निकासी का माध्यम नहीं बल्कि सेवानिवृत्ति के लिए सुरक्षित बचत सुनिश्चित करना होना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा