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नूंह के गांव दुबालू से दिल्ली तक पहुंची बलजीत सिंह डागर की सेवा यात्रा

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नूंह के गांव दुबालू से दिल्ली तक पहुंची बलजीत सिंह डागर की सेवा यात्रा


नूंह, 01 अक्टूबर (हि.स.)। नूंह जिले के छोटे से गांव दुबालू के किसान परिवार में जन्मे बलजीत सिंह डागर ने अपनी मेहनत, सामाजिक प्रतिबद्धता और जनसेवा के जरिए क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। सामाजिक सरोकार, पर्यावरण संरक्षण और जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें महात्मा अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया है।

नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में एक अक्टूबर को आयोजित कार्यक्रम में बलजीत सिंह डागर को ‘महात्मा गांधी अवार्ड 2026- लीडरशिप इन एनवायरमेंटल रिस्पांसिबिलिटी एंड सोशल इम्पैक्ट’ सम्मान प्रदान किया गया। ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय राजधानी में इस सम्मान को हासिल करना उनके गांव और पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बना है। वर्तमान में प्रतिष्ठित कंपनी जेके टायर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड में उपाध्यक्ष पद पर कार्यरत डागर ने कॉरपोरेट क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को भी प्राथमिकता दी। किसान परिवार से होने के कारण उनका ग्रामीण समाज और गांवों की समस्याओं से जुड़ाव लगातार बना रहा। यही जुड़ाव समय के साथ सामाजिक कार्यों की प्रेरणा बना।

बलजीत सिंह डागर ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, सामुदायिक विकास, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और जनजागरूकता से जुड़े कार्यों में भागीदारी की। गांवों में तालाबों के विकास एवं सौंदर्यीकरण, पौधारोपण तथा ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने जैसी पहलों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। उनका प्रयास रहा है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर सामूहिक प्रयासों के माध्यम से किया जाए।

क्षेत्र की जनसमस्याओं को लेकर उनकी सक्रियता का एक उदाहरण मंडकोला में मुंबई एक्सप्रेसवे पर कट की मांग को लेकर चला आंदोलन भी है। कट की मांग को लेकर क्षेत्र के लोगों ने 38 दिनों तक धरना दिया। इस आंदोलन में बलजीत सिंह डागर ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। लगातार प्रयास और जनभागीदारी के बाद क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण इस कट को मंजूरी मिली। महात्मा अवार्ड 2026 से सम्मानित होने के बाद दुबालू से लेकर मंडकोला और पूरे नूंह क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

महात्मा अवार्ड से पहले रतन टाटा, अजीम प्रेमजी, राजश्री बिरला, डॉ. प्रताप सी. रेड्डी, सुधा मूर्ति, शबाना आजमी, डॉ. किरण बेदी, डॉ. सोनल मानसिंह, बंकर रॉय और जतिन दास सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों को इस सम्मान से नवाजा जा चुका है। ऐसे प्रतिष्ठित नामों की श्रृंखला में नूंह के गांव दुबालू के किसान परिवार से निकले बलजीत सिंह डागर का शामिल होना उनके परिवार और क्षेत्र के लिए विशेष उपलब्धि है। दुबालू की ग्रामीण पगडंडियों से शुरू हुई बलजीत सिंह डागर की यात्रा दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर तक पहुंची है। खास बात यह है कि सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बावजूद उनका अपनी मिट्टी और ग्रामीण समाज से जुड़ाव बना हुआ है।

हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मोहानिया