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हिसार : प्रारंभिक बाल्यावस्था में सीखने के लिए अनुकूल वातावरण जरूरी : प्रो. बीआर कम्बोज

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हिसार : प्रारंभिक बाल्यावस्था में सीखने के लिए अनुकूल वातावरण जरूरी : प्रो. बीआर कम्बोज


हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में प्री-स्कूल प्रयोगशाला का पुन: शुभारंभ

हिसार, 26 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के इंदिरा चक्रवर्ती

सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के मानव विकास एवं पारिवारिक अध्ययन विभाग की प्री-स्कूल

प्रयोगशाला का शनिशार से पुन: शुभारंभ किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर

कम्बोज ने रिबन काटकर प्रयोगशाला का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि प्री-स्कूल शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चों को

वर्णमाला और गिनती सिखाना नहीं, बल्कि उनमें भाषा एवं संचार कौशल, आत्मनिर्भरता और

सामाजिक व्यवहार जैसे गुणों का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि बच्चे का सीखना स्कूल

जाने से बहुत पहले शुरू हो जाता है। प्रारंभिक बाल्यावस्था में बच्चे खेल, अनुभव, प्रश्न

पूछने और आसपास के वातावरण से सीखते हैं। ऐसे में उन्हें सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण

उपलब्ध करवाना जरूरी है, जहां वे स्वतंत्र रूप से सीख सकें, अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त

कर सकें और आत्मविश्वास विकसित कर सकें। कुलपति ने महाविद्यालय में विद्यार्थियों की

ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और उनके द्वारा तैयार गतिविधियों की सराहना

की। उन्होंने महाविद्यालय परिसर में मधुकामिनी का पौधा भी लगाया।

सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. मोनिका शर्मा ने बताया कि

विभाग की स्थापना 1979 में हुई थी, जबकि 2 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए प्री-स्कूल

प्रयोगशाला की स्थापना 1993 में की गई थी। कोरोना महामारी के दौरान इसका संचालन बंद

करना पड़ा था। अब 2026 में प्रयोगशाला को पुन: शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि

यहां बच्चों की आयु और विकास स्तर के अनुरूप वैज्ञानिक एवं शोध आधारित गतिविधियां करवाई

जाएंगी। बच्चों में दैनिक जीवन से जुड़े कार्यों और स्वावलंबन संबंधी कौशल विकसित करने

पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला से बच्चों के साथ उनके अभिभावकों,

विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भी लाभ मिलेगा। विद्यार्थी यहां विषय का व्यावहारिक

ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे, जबकि शोधार्थियों को प्रारंभिक बाल्यावस्था के विकास से जुड़े

विभिन्न विषयों पर शोध के अवसर मिलेंगे। कार्यक्रम का आयोजन सहायक वैज्ञानिक डॉ. वर्षा सैनी ने किया। सहायक वैज्ञानिक

डॉ. पूनम मलिक, सहायक प्राध्यापक डॉ. अन्नू व डॉ. रीना ने आयोजन में सहयोग दिया। डॉ.

रजनी खन्ना ने आभार व्यक्त किया। मंच संचालन छात्रा साक्षी ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर