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हरियाणा में ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर के लिए 11 हजार कराेड़ रुपये मंजूर

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चंडीगढ़, 24 मार्च (हि.स.)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में मंगलवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (एचओआरसी), रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो और और दिल्ली-पानीपत-करनाल आरआरटीएस कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिससे प्रदेश में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, औद्योगिकीकरण को नई गति मिलेगी।

यह फैसला मंगलवार काे मंत्रिमंडल की छह घंटे तक चली बैठक में किया गया। पूर्व की मनोहर सरकार ने प्रदेश के पहले ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी थी। अब इस परियोजना की संशोधित लागत यानी 11 हजार 709 करोड़ रुपये को मंजूरी दी। पहले यह योजना 5 हजार 618 करोड़ रुपये के लिए स्वीकृत हुई थी। लागत राशि में दोगुणा इजाफा किया है। बढ़ोतरी का कारण भूमि खरीद की बढ़ती कीमतें, एनसीआर क्षेत्र में पुल निर्माण, जीएसटी दर में वृद्धि और परियोजना दायरे का विस्तार बताया गया है।

ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना खरखौदा, मानेसर और सोहना जैसे प्रमुख औद्योगिक हब को रेल नेटवर्क से जोडक़र माल परिवहन में सुधार लाएगी। परियोजना एचओआरसीएल और एचआरआईडीसी के संयुक्त उद्यम मॉडल के तहत लागू होगी, जिसमें निजी भागीदार जैसे मारुति सुजुकी इंडिया और ऑलकार्गो लॉजिस्टिक्स शामिल हैं। इस परियोजना के पूरा होने पर राज्य के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब के बीच निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होगा, ट्रांजिट समय कम होगा और हरियाणा में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर

कैबिनेट ने नई दिल्ली के रिठाला-नरेला से कुंडली मेट्रो कॉरिडोर के हरियाणा हिस्से की संशोधित डीपीआर को मंजूरी दी। हरियाणा क्षेत्र में मेट्रो लाइन 2.726 किलोमीटर लंबी होगी, जिसमें कुंडली और नाथुपुर में दो एलिवेटेड स्टेशन बनेंगे। मोदी कैबिनेट इस योजना पर पहले ही मुहर लगा चुकी है। परियोजना की कुल लागत 545.77 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार 97.30 करोड़ और हरियाणा सरकार 448.48 करोड़ रुपये का योगदान देगी।

दिल्ली-पानीपत-करनाल आरआरटीएस कॉरिडोर

कैबिनेट ने दिल्ली-पानीपत-करनाल आरआरटीएस कॉरिडोर को भी मंजूरी दी। यह तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली प्रदेश में लागू करेगी। कॉरिडोर की कुल लंबाई 136.30 किलोमीटर होगी और इसमें हरियाणा में 11 स्टेशन शामिल होंगे। परियोजना की अनुमानित कुल लागत 33 हजार 51 करोड़ है, जिसमें हरियाणा सरकार का हिस्सा ₹7,472.11 करोड़ है। आरआरटीउस के तहत स्टेशनों के आसपास ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) की अनुमति दी जाएगी, जिससे नियोजित शहरी विकास और अतिरिक्त संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। डिपो के बुनियादी ढांचे को एनसीआरटीसी और संबंधित भूमि-स्वामित्व वाली एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा