पेपर लीक के दोषियों को दस साल सजा व 50 लाख जुर्माना
हरियाणा ने लागू किया केंद्र सरकार का कानून
चंडीगढ़, 06 नवंबर (हि.स.)। विभिन्न परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक या परीक्षाओं में धांधली की घटनाओं पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लागू किए द पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 के प्रावधानों को अब हरियाणा ने भी लागू कर दिया है।
हरियाणा के उच्च शिक्षा विभाग, सभी सरकारी कॉलेजों, एनसीसी यूनिट्स और पुस्तकालयों में सख्ती से लागू करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। उच्च शिक्षा महानिदेशक एस. नारायणन द्वारा शुक्रवार को जारी परिपत्र के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त निर्देशों के तहत राज्य के सभी सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों, एनसीसी कमांडिंग अफसरों और जिला व उप-मंडल पुस्तकालय अध्यक्षों को इस कानून का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
(प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 के प्रावधानों के अनुसार सामान्य नकल, पेपर लीक या फर्जी एडमिट कार्ड/वेबसाइट बनाने वाले दोषियों के लिए जेल की न्यूनतम सजा को बढ़ाकर 5 साल (अधिकतम 10 साल) कर दिया गया है। साथ ही जुर्माना 50 लाख तक तय किया गया है।
यदि कोई संगठित गिरोह या संस्थान इसमें संलिप्त पाया जाता है, तो न्यूनतम 7 साल से 10 साल तक की कैद और कम से कम 10 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान है। परीक्षा आयोजित करने वाली प्राइवेट एजेंसियों या कंपनियों के दोषी पाए जाने पर 5 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जाएगा, परीक्षा का पूरा खर्च वसूला जाएगा और उन्हें 8 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट (प्रतिबंधित) कर दिया जाएगा। इस कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय , गैर-जमानती और गैर-शमनीय होंगे।
नए नियमों के अनुसार पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी एस एसटीएफ को दो माह के भीतर जांच पूरी करनी होगी। राज्य सरकार तथा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सलाह से विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जाएगा। पेपर लीक जैसे मामलों की सुनवाई रोजाना के आधार पर होगी और आरोप पत्र दाखिल होने के तीन माह के भीतर मुकदमे का निपटारा करना अनिवार्य होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

