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हिसार : डिजिटल युग में और बढ़ी पुस्तकालयों की जिम्मेदारी, रंगनाथन के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक : प्रो. नरसी राम बिश्नोई

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हिसार : डिजिटल युग में और बढ़ी पुस्तकालयों की जिम्मेदारी, रंगनाथन के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक : प्रो. नरसी राम बिश्नोई


राष्ट्रीय लाइब्रेरियन दिवस पर गुजविप्रौवि में संगोष्ठी, विशेषज्ञ ने बताया-कृत्रिम बुद्धिमत्ता

के दौर में भी पुस्तकालय ज्ञान का मजबूत आधार

हिसार, 13 अगस्त (हि.स.)। सूचना और तकनीक के तेजी से बदलते दौर में ज्ञान के

स्रोत भले ही बदल गए हों, लेकिन पुस्तकालयों का महत्व आज भी कायम है। बल्कि डिजिटल

युग में विश्वसनीय और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध करवाने की चुनौती के चलते पुस्तकालयों

की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

यह बात गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.

नरसी राम बिश्नोई ने गुरुवार काे राष्ट्रीय लाइब्रेरियन दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कही।

विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय लाइब्रेरियन

दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में 21वीं सदी के बदलते सूचना परिदृश्य में

पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस.आर. रंगनाथन के विचारों और सिद्धांतों की प्रासंगिकता

पर मंथन किया गया। कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना

विज्ञान विभाग के प्रो. मनोज कुमार जोशी ने ‘21वीं सदी में रंगनाथन के विचारों की प्रासंगिकता’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान

दिया।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि आज का समय सूचना की बाढ़ का समय है।

इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने जानकारी तक पहुंच को बेहद आसान बना दिया है, लेकिन

सही, प्रमाणिक और उपयोगी जानकारी की पहचान करना बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे समय में

पुस्तकालय केवल पुस्तकों को उपलब्ध करवाने वाले केंद्र नहीं, बल्कि विश्वसनीय ज्ञान

और प्रमाणिक सूचना के मार्गदर्शक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने

कहा कि शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में पुस्तकालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञ व्याख्यान में प्रो. मनोज कुमार जोशी ने डॉ. एसआर रंगनाथन के पुस्तकालय

एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा

कि रंगनाथन के विचार अपने समय से आगे थे और आज डिजिटल युग में भी उनकी प्रासंगिकता

बनी हुई है। उन्होंने विशेष

रूप से रंगनाथन के प्रसिद्ध सिद्धांत ‘हर पाठक को उसकी पुस्तक मिले’ का उल्लेख करते हुए

कहा कि आज सूचना के विशाल भंडार के बीच प्रत्येक उपयोगकर्ता को उसकी आवश्यकता के अनुरूप

सही और उपयोगी सूचना उपलब्ध करवाना पहले से अधिक जरूरी हो गया है।

कार्यक्रम का संचालन पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय

लाइब्रेरियन डॉ. विनोद कुमार ने किया। इस अवसर पर असिस्टेंट लाइब्रेरियन सोमदत्त एवं

विनायक वाधवा सहित विश्वविद्यालय पुस्तकालय के कर्मचारी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर