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हरियाणा:खरीफ से रबी तक लागू रहेगी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

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-धान, बाजरा, मक्का, कपास, मूंग समेत 10 फसलें शामिल

चंडीगढ़, 29 जुलाई (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। योजना के तहत खरीफ में धान, बाजरा, मक्का, कपास और मूंग तथा रबी में गेहूं, जौ, चना, सरसों और सूरजमुखी की फसलों को अधिसूचित किया गया है।

सरकार ने पूरे प्रदेश में क्लस्टर आधारित व्यवस्था लागू रखते हुए फसलों का बीमा, बीमित राशि, प्रीमियम दरें, बीमा इकाई और दावों के निपटान संबंधी प्रावधान तय कर दिए हैं। हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अधिसूचना के अनुसार योजना सभी ऋणी और गैर-ऋणी किसानों के लिए वैकल्पिक रहेगी। मौजूदा ऋणी किसानों के लिए यह आप्ट-आउट आधार पर संचालित होगी। जो किसान योजना से बाहर रहना चाहते हैं, उन्हें नामांकन की अंतिम तिथि से कम से कम सात दिन पहले निर्धारित घोषणा पत्र जमा करना होगा। गैर-ऋणी किसान स्वयं आनलाइन या कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे।

योजना के तहत सूखा, बाढ़, जलभराव, कीट एवं रोग प्रकोप, ओलावृष्टि, तूफान जैसी व्यापक प्राकृतिक आपदाओं के अलावा स्थानीय आपदाओं तथा कटाई के बाद अधिकतम दो सप्ताह तक होने वाले ओलावृष्टि, चक्रवाती वर्षा और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान को भी कवर किया जाएगा। स्थानीय आपदा से हुए नुकसान की सूचना किसानों को 72 घंटे के भीतर देनी होगी, जिसे कृषि रक्षक पोर्टल एवं हेल्पलाइन 14447 या क्राप लास मोबाइल ऐप के माध्यम से दर्ज कराया जा सकेगा।

हरियाणा सरकार ने खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक 90 प्रतिशत इंडेम्निटी लेवल यथावत रखा है। प्रति हेक्टेयर बीमित राशि धान के लिए 1 लाख 11 हजार 561 रुपये, कपास के लिए 1 लाख 14 हजार 136 रुपये, गेहूं के लिए 84 हजार 386 रुपये, सरसों के लिए 56 हजार 639 रुपये, चने की फसल के लिए 41 हजार 478 रुपये, जौ के लिए 53 हजार 779 रुपये, मक्का और सूरजमुखी 57 हजार 211 रुपये तथा मूंग 50 हजार 59 रुपये निर्धारित की गई है। किसानों का प्रीमियम रबी फसलों के लिए 1.50 प्रतिशत, खरीफ फसलों के लिए 2 प्रतिशत तथा कपास के लिए 5 प्रतिशत रहेगा। वास्तविक प्रीमियम और किसान हिस्से के बीच का अंतर राज्य और केंद्र सरकार 50:50 के अनुपात में वहन करेंगी।

अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गेहूं और धान की उपज का आकलन तकनीक आधारित प्रणाली से किया जाएगा, जबकि अन्य फसलों के लिए क्राप कटिंग प्रयोग (सीसीई) के आधार पर उपज तय होगी। हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (हरसेक) तकनीकी कार्यान्वयन भागीदार रहेगा।

योजना के तहत किसानों के नामांकन की अंतिम तिथि खरीफ के लिए 31 जुलाई और रबी के लिए 31 दिसंबर निर्धारित की गई है। बीमा कंपनियों को निर्धारित समय सीमा में दावों का निपटान करना होगा और देरी होने पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से दंडात्मक ब्याज का प्रावधान भी किया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा