एकता और मेहनत से महिलाओं ने जूता कारोबार को बनाया आजीविका का मजबूत साधन
नूंह, 30 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ रही हैं। वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेकर महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि सामूहिक प्रयासों से सफल व्यवसाय भी खड़े कर रही हैं। फिरोजपुर झिरका खंड के गांव बसई मेव की चांद स्वयं सहायता समूह की सदस्य पिंकी की सफलता इसका उदाहरण है।
एचएसआरएलएम के माध्यम से स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन रहे हैं। महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, बैंकिंग सुविधाओं और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की जा रही है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाओं को स्थायी आजीविका के साधनों से जोड़ा जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर परिवार और गांव के विकास में योगदान दे सकें।
चांद स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले पिंकी जूते की एक छोटी दुकान पर काम करती थीं। एचएसआरएलएम से जुड़ने के बाद उन्होंने समूह की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर जूते का कारोबार शुरू किया। मिशन के तहत समूह को कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआईएफ) के रूप में 8.50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिली। इस राशि का उपयोग महिलाओं ने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने और उसका विस्तार करने में किया।
पिंकी ने बताया कि शुरुआत में समूह से सात महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी थीं। इसके बाद समूह ने बैंक से ऋण सुविधा प्राप्त कर कारोबार को विस्तार दिया। बैंक से दो बार में कुल 4.50 लाख रुपये का ऋण मिला। महिलाओं की मेहनत, आपसी सहयोग और बेहतर प्रबंधन के चलते समूह का कुल लेन-देन अब करीब 12 से 13 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में समूह की छह महिलाएं जूते की दुकान का संचालन कर रही हैं। दुकान के लिए माल खरीदने से लेकर उसकी बिक्री और हिसाब-किताब रखने तक की जिम्मेदारी महिलाएं स्वयं संभाल रही हैं। इससे उन्हें नियमित आजीविका के साथ अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग करने का अवसर मिल रहा है।
पिंकी ने कहा कि पहले उनका उद्देश्य केवल अपनी आजीविका चलाना था, लेकिन एचएसआरएलएम और स्वयं सहायता समूह से मिले सहयोग के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि समूह की महिलाओं की एकजुटता और सामूहिक प्रयास कारोबार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं। बैंकिंग सुविधाओं और मिशन से मिली वित्तीय सहायता ने व्यवसाय को विस्तार देने में मदद की। आज समूह की महिलाएं स्वयं कारोबार संभाल रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने में योगदान दे रही हैं।
एचएसआरएलएम के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बचत, बैंक लिंकेज, ऋण और सामुदायिक निवेश जैसी सुविधाओं से जोड़कर ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका के अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। चांद स्वयं सहायता समूह की सफलता बताती है कि एकजुटता, मेहनत, सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग कर ग्रामीण महिलाएं छोटे व्यवसाय को आगे बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकती हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मोहानिया

