जींद : हरियाली अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान
जींद, 12 अगस्त (हि.स.)। पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर बुधवार को हरियाली अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान किया। पिंडदान कर पितृ तर्पण किया और सुखद भविष्य की कामना की। अमावस्या को देखते हुए तीर्थ पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर मंगलवार शाम से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। इस दौरान धर्मशालाओं में सत्संग तथा कीर्तन आदि का आयोजन चलता रहा। बुधवार सुबह ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान तथा पिंडदान शुरू कर दिया जो दोपहर बाद तक चलता रहा। इस मौके पर दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया तथा सूर्यदेव को जलार्पण करके सुख समृद्धि की कामना की। पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है।
महंत स्वामी राघवानंद ने तीर्थ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अमावस्या को दान पुण्य करना अधिक फलदायी होता है। सोमतीर्थ पांडू पिंडारा का महत्व पौराणिक काल से ही सर्वोपरि रहा है। महाभारत युद्ध के पश्चात भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं पांडवों को पितृ तर्पण के लिए इस पावन धरा पर भेजा था। जो भी श्रद्धालु इस तीर्थ की पावन भूमि पर कदम रखता है, उसे एक साथ तीन दिव्य पुण्यों पृथ्वी, जल और आकाश की प्राप्ति होती है। इस पावन स्थल के जल को स्पर्श करने मात्र से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है। तीर्थ पर जुटने वाली अपार भीड़ का जिक्र करते हुए महंत स्वामी राघवानंद ने स्थानीय प्रशासन का ध्यान पानी की स्वच्छता की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि जब सरकार और प्रशासन ने तीर्थ के लिए रजवाहे (नहर) के माध्यम से अलग से पानी की व्यवस्था कर रखी है तो उस स्वच्छ जल को नियमित रूप से तीर्थ सरोवर तक पहुंचाना भी प्रशासन का नैतिक दायित्व है।
हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा

