हिसार : अब नहीं चलेगी निजी बस संचालकों की मनमानी, मानने होंगे मुफ्त यात्रा के नियम
‘फ्री’ और ‘कन्सेशनल’ पास धारकों को यात्रा करवानी होगी
परिवहन आयुक्त ने पत्र जारी करके दिए संचालकोें
को निर्देश
हिसार, 21 अप्रैल (हि.स.)। राज्य में निजी बस
संचालकों की मनमानी व सरकारी बसों के पास न मानने की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच
विभाग ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। परिवहन आयुक्त पत्र जारी करके निर्देश दिए हैं
कि राज्य के सभी निजी स्टेज कैरिज संचालकों को हरियाणा रोडवेज की तरह ही सभी श्रेणियों
के ‘फ्री’ और ‘कन्सेशनल’ पास धारकों को यात्रा
करवानी होगी। पत्र की प्रति जिला स्तर पर सभी डीटीओ-सह-सचिवों को भेजी गई है।
परिवहल आयुक्त की ओर से जारी इस पत्र में खास
बात ये है कि अगर कोई निजी बस संचालक पास होने के बावजूद यात्री को बस में चढ़ने से
रोकता है, तो इसकी शिकायत संबंधित क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) कार्यालय या
सीधे परिवहन विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर कर सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह
आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हैं, जिसके दायरे में प्रदेश में संचालित हो रही करीब
1750 निजी बसें आएंगी। ‘स्टेज कैरिज स्कीम 2016’ की शर्तों का उल्लंघन करने वाले संचालकों
पर अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पत्र में कहा गया है कि निजी बसों को छात्रों,
दिव्यांगों और अन्य रियायती पास धारकों को ठीक उसी तरह ले जाना होगा जैसे हरियाणा रोडवेज
की बसें ले जाती हैं। पत्र में साफ किया है कि इस सेवा के बदले निजी बस संचालकों को
किसी भी प्रकार की सरकारी सब्सिडी देय नहीं होगी। यह उनके परमिट की अनिवार्य शर्तों
का हिस्सा है। पत्र में साल 2017 के पुराने आदेशों का हवाला देते हुए याद दिलाया गया
है कि परमिट धारक इन नियमों को मानने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं।
नियमों को न मानने पर होगी सख्त कार्रवाई : अधीक्षक
परिवहन विभाग के अधीक्षक बलजिंदर सिंह ने बताया
कि विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि निजी बस चालक छात्रों और बुजुर्गों को
पास होने के बावजूद बस में नहीं बैठाते या उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। इन शिकायतों
का संज्ञान सरकार ने लिया है। उन्होंने बताया कि जनहित में नियमों का सख्ती से पालन
सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित
अधिकारी और बस संचालक के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की जाएगी।
लॉ स्टूडेंट की याचिका पर हाईकोर्ट भी जारी कर
चुका आदेश
करीब सात माह पहले हिसार कोर्ट ने बड़ा फैसला
सुनाते हुए कहा था कि जब तक हाईकोर्ट से कोई स्थगन आदेश (स्टे) नहीं आता, तब तक प्राइवेट
बसों में भी सरकारी रियायती पास मान्य रहेंगे। यह आदेश लॉ छात्रा पूजा बिश्नोई की ओर
से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया था। छात्रा ने मांग की थी कि सरकारी पास
को प्राइवेट बसों में भी मान्यता मिले। यह फैसला प्राइवेट बस संचालकों के लिए बड़ा
झटका है, क्योंकि वे अब तक सरकारी पास को अपनी बसों में स्वीकार करने से इनकार करते
रहे हैं। इसी मामले को लेकर प्राइवेट बस संचालकों ने हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की
हुई है, लेकिन अभी तक कोई स्टे ऑर्डर नहीं मिला है।
रोडवेज को मिलता है पैसा, हम क्यों उठाएं घाटा
: धनसिंह
उधर, स्टेट गैरिज ट्रांसपोर्ट सोसायटी एंड प्राइवेट
बस ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के राज्य प्रधान, डॉ. धन सिंह ने परिवहन विभाग के आदेशों
पर प्रतिक्रिया देते हुए मंगलवार काे कहा कि जब तक सरकार भुगतान और प्रतिपूर्ति की लिखित नीति स्पष्ट
नहीं करती, तब तक रोडवेज के पास उनकी बसों में मान्य नहीं होंगे। डॉ. धन सिंह ने बताया
कि रोडवेज स्वयं पास जारी कर यात्रियों से या संबंधित विभागों से पैसा वसूलता है। ऐसे
में निजी ऑपरेटर मुफ्त यात्रा कराकर आर्थिक नुकसान क्यों झेलें? बिना भुगतान के सेवा
लेना संवैधानिक अधिकारों का हनन है। एसोसिएशन ने तर्क दिया कि रोडवेज के पास उनकी अपनी
ही एसी और सिटी बसों में मान्य नहीं होते, तो निजी बसों पर इन्हें थोपना तर्कहीन है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

