पलवल : शिक्षा को कौशल और उद्योग से जोड़ना जरूरी: महिपाल ढांडा
पलवल, 24 जुलाई (हि.स.)। श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय (एसवीएसयू) में शुक्रवार को हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के तत्वावधान में उच्च शिक्षा में कौशल आधारित पाठ्यक्रम एवं माइक्रो क्रेडेंशियल विषय पर शुक्रवार काे अनुवर्ती कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन हरियाणा के उच्च शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार योग्य और उद्यमशील बनाने के लिए शिक्षा को कौशल एवं उद्योग से जोड़ना अनिवार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने उच्च शिक्षा को लचीला और रोजगारोन्मुखी बनाया है तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन से ही भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा।
शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और अकादमिक प्रतिनिधियों से कौशल आधारित कार्यक्रमों को पाठ्यक्रम में समाहित करने तथा माइक्रो क्रेडेंशियल को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सभी विश्वविद्यालयों में स्किल आधारित शिक्षा का समन्वय होने से हरियाणा की उच्च शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालयों द्वारा कौशल आधारित कार्यक्रमों और माइक्रो क्रेडेंशियल पर किए गए कार्यों की समीक्षा भी की। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्य अधिकारी डॉ. राज नेहरू ने कहा कि हरियाणा का ग्रॉस इनरोलमेंट रेशियो वर्तमान में लगभग 33 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि आज उद्योग जगत माइक्रो क्रेडेंशियल को विशेष महत्व दे रहा है, इसलिए विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए इस दिशा में गंभीरता से कार्य करना होगा। हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि यूजीसी के निर्देशों के अनुरूप इंटर्नशिप और व्यवहारिक शिक्षा को पाठ्यक्रम से जोड़ना परिषद की प्राथमिकता है।
एसवीएसयू के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार किए गए स्किल प्रोग्राम और माइक्रो क्रेडेंशियल विद्यार्थियों के प्लेसमेंट और करियर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कार्यशाला के आयोजन के लिए उच्च शिक्षा परिषद का आभार व्यक्त किया। इससे पूर्व राज्य परियोजना निदेशक प्रो. आर.एस. राठौड़ ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालय के नव निर्मित कॉन्फ्रेंस रूम का उद्घाटन, 'कौशल संवाद' न्यूज़लेटर का विमोचन तथा परिसर में पौधारोपण किया। उन्होंने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए स्टार्टअप प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
हिन्दुस्थान समाचार / गुरुदत्त गर्ग

