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पलवल: 85 वर्षीय सास को टब में बैठाकर बृज चौरासी कोस परिक्रमा करा रही बहू

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पलवल: 85 वर्षीय सास को टब में बैठाकर बृज चौरासी कोस परिक्रमा करा रही बहू


पलवल, 02 जून (हि.स.)। बदलते सामाजिक परिवेश में जहां संयुक्त परिवारों की परंपरा और रिश्तों में अपनापन लगातार कम होता दिखाई दे रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के कोसीकलां निवासी प्रीति चौधरी ने अपनी सेवा भावना और पारिवारिक संस्कारों से समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। वह अपनी 85 वर्षीय सास चंद्रो देवी को टब में बैठाकर पवित्र बृज चौरासी कोस परिक्रमा करा रही हैं।

वृद्धावस्था के कारण चंद्रो देवी स्वयं पैदल परिक्रमा करने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन उनकी धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी इच्छा को पूरा करने के लिए बहू प्रीति चौधरी ने जिम्मेदारी अपने हाथों में ली है। उनका यह समर्पण श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बृज चौरासी कोस परिक्रमा को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कई किलोमीटर लंबे इस मार्ग को पूरा करना सामान्य व्यक्ति के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में एक वृद्ध महिला को साथ लेकर परिक्रमा कराना सेवा, धैर्य और समर्पण का अनूठा उदाहरण माना जा रहा है।

परिक्रमा मार्ग पर प्रीति चौधरी अपनी सास की हर आवश्यकता का ध्यान रख रही हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह दृश्य भारतीय संस्कृति में बड़ों के प्रति सम्मान और सेवा भाव की परंपरा को जीवंत करता है। कई लोगों ने इसे आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया। प्रीति चौधरी का कहना है कि उनकी सास की इच्छा थी कि वह बृज चौरासी कोस परिक्रमा करें। जब स्वास्थ्य कारणों से उनके लिए यह संभव नहीं था तो उन्होंने स्वयं यह जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया। उनके अनुसार माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा करना प्रत्येक संतान और परिवार के सदस्य का कर्तव्य है। स्थानीय लोगों और परिक्रमा में शामिल श्रद्धालुओं ने प्रीति चौधरी के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने यह साबित कर दिया है कि रिश्ते केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और समर्पण से निभाए जाते हैं। उनका यह कार्य समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है और आने वाली पीढ़ियों को पारिवारिक मूल्यों तथा संस्कारों की महत्ता का एहसास कराता है।

हिन्दुस्थान समाचार / गुरुदत्त गर्ग