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सोनीपत: सैनिकों और शहीद परिवारों का सम्मान समाज की साझा जिम्मेदारी: अरविंद शर्मा

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सोनीपत: सैनिकों और शहीद परिवारों का सम्मान समाज की साझा जिम्मेदारी: अरविंद शर्मा


सोनीपत: सैनिकों और शहीद परिवारों का सम्मान समाज की साझा जिम्मेदारी: अरविंद शर्मा


सोनीपत, 25 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा

सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों

के साहस और समर्पण के कारण ही नागरिक सुरक्षित जीवन जी पाते हैं। सैनिकों, पूर्व सैनिकों

और शहीदों के परिजनों का सम्मान करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र

मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार उनके सम्मान और कल्याण के

लिए प्रतिबद्ध है।

डॉ.

अरविंद शर्मा शहर के हरी पैलेस में रविवार को पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से

आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों के साथ शहीदों

के परिजनों ने भी भाग लिया। इस दौरान शहीद परिवारों को सम्मानित किया गया और देश की

रक्षा में वीर जवानों के योगदान तथा उनके सर्वोच्च बलिदान को याद किया गया। कार्यक्रम

में पूर्व सैनिकों ने आठवें वेतन आयोग सहित अपनी विभिन्न मांगें कैबिनेट मंत्री के

सामने रखीं। उन्होंने अपनी समस्याओं और अपेक्षाओं से भी उन्हें अवगत कराया। डॉ. शर्मा

ने उनकी बातें सुनीं और उठाए गए मुद्दों की जानकारी ली। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सैनिक

कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते। परिवारों से दूर रहकर देश

की सुरक्षा करना और हर चुनौती का सामना करना उनके समर्पण को दर्शाता है। देश के लिए

उनके त्याग और सेवाभाव के प्रति हर नागरिक के मन में सम्मान होना चाहिए।

उन्होंने

कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी पूर्व सैनिक अपने अनुशासन, अनुभव और देशभक्ति से समाज

को दिशा देते हैं। युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रसेवा और सामाजिक जिम्मेदारियों

के निर्वहन के लिए आगे आना चाहिए। पूर्व सैनिकों का अनुभव सज की महत्वपूर्ण धरोहर है।

डॉ.

शर्मा ने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने

वाले जवानों का राष्ट्र सदैव ऋणी रहेगा। उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। शहीदों

के परिजनों का सम्मान करने के साथ उनके सुख-दुख में सहभागी बनना भी समाज का दायित्व

है। उन्होंने कहा कि सैनिकों के प्रति सम्मान केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहना चाहिए,

बल्कि यह हमारे व्यवहार और कार्यों में भी दिखाई देना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / नरेंद्र शर्मा परवाना