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नवजात की मौत का मामला : स्टाफ नर्स पर गिरेगी गाज, परिवार को मुआवजे के निर्देश

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हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने नवजात की मौत मामले पर लिया संज्ञान, भिवानी एसपी को जांच तेज करने के निर्देश

चंडीगढ़, 21 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने भिवानी जिले के नकीपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में प्रसव के बाद नवजात शिशु की मौत मामले पर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने संबंधित स्टाफ नर्स के विरुद्ध नियमित विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश की है। साथ ही, शोकाकुल परिवार को आर्थिक मुआवजा देने पर विचार करने और मामले में दर्ज एफआईआर की जांच तेज करने के निर्देश दिए हैं।

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, सदस्य कुलदीप जैन व दीप भाटिया ने सुनवाई के दौरान जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड, भिवानी की जांच रिपोर्ट में सामने आई चिकित्सा संबंधी गंभीर कमियों और निर्धारित प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट भी तलब की है।

सिविल अस्पताल, भिवानी स्थित जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड के सदस्य सचिव-सह-मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने 16 जून, 2026 को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट के अनुसार, पीएचसी नकीपुर में प्रसव के समय कोई चिकित्सक उपस्थित नहीं था और स्टाफ नर्स ने अन्य कर्मचारियों की सहायता से प्रसव करवाया। मामला उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था का होने के बावजूद निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, जबकि ऐसी स्थिति में चिकित्सक की उपस्थिति और आवश्यक चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करना जरूरी था।

जांच में यह भी सामने आया कि नवजात को बाद में भिवानी की विशेष नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू) लाया गया, जहां उसे मृत अवस्था में लाया गया । बोर्ड के अनुसार, नवजात को तत्काल पुनर्जीवन संबंधी चिकित्सा सहायता की जरूरत थी, लेकिन इस गंभीर स्थिति के दौरान संबंधित स्टाफ नर्स द्वारा टीकाकरण करने में बहुमूल्य समय व्यर्थ हुआ। आयोग ने इन निष्कर्षों को गंभीर मानते हुए कहा कि ऐसी चूक बच्चे के जीवन के अधिकार और सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में समुचित चिकित्सा देखभाल पाने के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

विभागीय कार्रवाई के साथ मुआवजे पर भी विचार

आयोग ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सेवाएं विभाग के महानिदेशक, पंचकूला और भिवानी के सिविल सर्जन को संबंधित स्टाफ नर्स के विरुद्ध लागू सेवा नियमों के अनुसार नियमित विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने तथा कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

आयोग ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों, प्रसव संबंधी सेवाएं लेने वाली महिलाओं और नवजात शिशुओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना अधिकारियों और कर्मचारियों का महत्वपूर्ण दायित्व है। आयोग के सहायक रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि आपराधिक जांच के संबंध में आयोग ने पुलिस थाना लोहारू की रिपोर्ट का अवलोकन किया। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत एफआईआर संख्या 122, दिनांक 1 अगस्त, 2026, दर्ज है। आयोग ने भिवानी के पुलिस अधीक्षक को जांच में तेजी सुनिश्चित करने और अगली सुनवाई से कम-से-कम एक सप्ताह पहले जांच की स्थिति संबंधी रिपोर्ट आयोग के निदेशक (जांच) के माध्यम से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी, 2027 को निर्धारित की गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा