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नूंह: सरकारी स्कूलों में कहीं बंधते हैं पशु तो कहीं पेड़ों के नीचे लगती है क्लास

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नूंह: सरकारी स्कूलों में कहीं बंधते हैं पशु तो कहीं पेड़ों के नीचे लगती है क्लास


-मानवाधिकार आयोग ने नूंह के सरकारी स्कूलों के ऐसे हालातों पर मांगी रिपोर्ट

-सरकारी स्कूलों की बदहाली पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग गंभीर

नूंह/गुरुग्राम, 08 मई (हि.स.)। नूंह जिला के सरकारी स्कूलों की एक ऐसी हालत सामने आई है, जो हमारी शिक्षा पद्धति और कार्यप्रणाली को शर्मसार करने वाली है। पता चला है कि नूंह जिला के एक स्कूल में दिन में तो पढ़ाई होती है, मगर शाम को वहां पर पशु बांध दिए जाते हैं। कुछ स्कूलों में इमारत की जगह पेड़ों के नीचे पढ़ाई होती हे। सरकारी स्कूलों की ऐसी बदहाली पर हरियाणा के मानवाधिकार आयोग ने सख्ती दिखाते हुए स्वत: ही संज्ञान लेते हुए जिला उपायुक्त व जिला शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट तलब की है।

हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने जिला नूंह के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की अत्यंत चिंताजनक एवं अमानवीय स्थिति पर गंभीर रुख अपनाते हुए स्वत: ही संज्ञान लिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा तथा सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया के समक्ष आए तथ्यों के अनुसार जिला नूंह के फिरोजपुर झिरका क्षेत्र में कई सरकारी प्राथमिक विद्यालय बिना भवनों के संचालित हो रहे हैं। राजकीय प्राथमिक विद्यालय गांव कुबड़ा बास कथित रूप से एक पशुशाला में चलाया जा रहा है। वहां 29 छात्र एवं 33 छात्राएं बाल वाटिका से कक्षा तीसरी तक के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यालय का समय खत्म होने के बाद उसी परिसर में गाय एवं भैंस बांधी जाती है। पशुओं का चारा भी वहीं रखा जाता है। सफाई के बावजूद परिसर में दुर्गंध आती रहती है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य एवं अध्ययन वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह भी बताया गया है कि विद्यालय केवल एक निजी भूमि के मालिक द्वारा दी गई अस्थायी अनुमति के कारण संचालित हो रहा है, जो कि स्थायी सरकारी भवन के अभाव को दर्शाता है। यह विद्यालय भी उन 19 विद्यालयों में से एक है जो गुरुग्राम से सटे हरियाणा के इस जिले में बिना भवन के संचालित हो रहे हैं।

कालू बास के स्कूल में पेड़ों से लटकाए जाते हैं बोर्ड

गांव कालू बास का राजकीय प्राथमिक विद्यालय खुले मैदान में संचालित हो रहा है। वहां 45 लडक़ों और 50 लड़कियों को पेड़ों से बंधे ब्लैक बोर्ड के सामने पढ़ाया जा रहा है। मानसून के दौरान पूरा मैदान कीचड़ में तब्दील हो जाता है। सर्दियों में बच्चों को अत्यधिक ठंड जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे शिक्षा का वातावरण अत्यंत असुरक्षित बन जाता है। आयोग का मानना है कि ऐसी परिस्थितियां बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर समझौते के समान हैं। गांव कुबड़ा बास में नियुक्त एक सरकारी शिक्षक ने स्थिति को दर्दनाक बताते हुए कहा कि वह बच्चों को एक असुरक्षित कमरे में पढ़ाने के लिए विवश हैं, जहां मानसून के दौरान चारों ओर से वर्षा का पानी टपकता है। गर्मियों में अत्यधिक गर्मी के कारण कक्षाओं का संचालन भीतर करना लगभग असंभव हो जाता है। विद्यालय भवन निर्माण के लिए चिन्हित पंचायत भूमि कथित रूप से ग्राम रावली में स्थित है, जो लगभग साढ़े तीन किलोमीटर दूर है। यह भी छोटे बच्चों के लिए व्यावहारिक नहीं है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग की ओर से नूंह के उपायुक्त, जिला शिक्षा अधिकारी से मांगी गई है।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर