नारनाैल में माइंस के विरोध में उतरे ग्रामीण, नियमों की अनदेखी के लगाए आरोप
एनओसी जारी करने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
नारनाैल, 18 अक्टूबर (हि.स.)। नांगल चौधरी क्षेत्र के दौंखेरा गांव में पहाड़ पर प्रस्तावित माइंस को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया है। रविवार को ग्रामीणों ने बैठक कर माइंस के लिए एनओसी जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए। ग्रामीणों ने सोमवार से जिला उपायुक्त कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का सामूहिक निर्णय लिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ के आसपास मंदिर, आवासीय मकान और अन्य सार्वजनिक संपत्तियां मौजूद हैं। इसके बावजूद माइंस के लिए लीज आवंटित कर दी गई। ग्रामीण कालू बटार ने कहा कि माइंस की नीलामी से पहले निर्धारित मानकों के अनुसार स्थल का आकलन करना जरूरी है। मंदिर, आबादी, स्कूल, अरावली क्षेत्र और सार्वजनिक संपत्तियों से निर्धारित दूरी के नियमों की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि दौंखेरा पहाड़ के पास मंदिर और आवासीय मकान होने के बावजूद संबंधित विभाग ने आवेदक को एनओसी जारी कर दी। इसके आधार पर लीज आवंटित हुई। ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष पैमाइश कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि खनन शुरू होने से आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। उनका आरोप है कि करीब एक महीने से माइंस संचालक तेजी से मिट्टी उठाने और रास्ता बनाने का काम कर रहा है।
पूर्व सरपंच लालचंद, महावीर और बलाराम ने बताया कि पहाड़ पर खनन को लेकर प्रशासन को पहले भी शिकायतें दी गई हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि भारी ब्लास्टिंग से ग्रामीणों को खतरा हो सकता है। इसी के विरोध में धरना देने का फैसला लिया गया है। वहीं, जिला माइंस अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि लीज होल्डर ने विभिन्न विभागों की एनओसी प्रस्तुत की थी। इसके बाद ही नीलामी और लीज आवंटन की प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने कहा कि आबादी और सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े निर्धारित मानकों की जांच लीज आवंटन से पहले की जाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला

