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नारनौल:पिता हुए ठगी का शिकार तो बेटे ने बनाई ‘सुरक्षित यूपीआई प्रणाली’

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नारनौल:पिता हुए ठगी का शिकार तो बेटे ने बनाई ‘सुरक्षित यूपीआई प्रणाली’


साइबर ठगी रोकने के लिए युवा इंजीनियरिंग छात्र की पहल

नारनाैल, 10 मई (हि.स.)। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के युवा अंकित ठाकुर ने ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक वैकल्पिक यूपीआई प्रणाली विकसित करने का दावा किया है। कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के बीटेक छात्र अंकित ने कहा कि उनकी तैयार की गई प्रणाली में साइबर ठगी की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने इस तकनीक को भारत सरकार को मुफ्त में अपनाने का प्रस्ताव भी दिया है, ताकि देशभर के करोड़ों यूपीआई उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित डिजिटल भुगतान सुविधा मिल सके।

महेंद्रगढ़ जिले के तलवाना खेरी गांव निवासी अंकित ने रविवार को बताया कि वे इस प्रणाली का पेटेंट अपने नाम से करा सकते थे, लेकिन उनका उद्देश्य लोगों को साइबर अपराधियों से बचाना है। उनका कहना है कि यह नई व्यवस्था गलत ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से होने वाले आर्थिक नुकसान को भी रोकने में मदद करेगी। अंकित ने बताया कि वर्ष 2020 में उनके पिता सुनील, जो पेशे से चालक हैं, ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गए थे और उनके 20 हजार रुपये साइबर अपराधियों ने ठग लिए थे।

इस घटना के बाद उन्होंने यूपीआई एप्लिकेशन में मौजूद तकनीकी कमजोरियों पर शोध शुरू किया। लगातार अध्ययन और परीक्षण के बाद उन्होंने तीन प्रमुख खामियों की पहचान की क्रोम इंटेंट वल्नरेबिलिटी, ऑथेंटिकेशन बायपास और ऑडियो हाइजैकिंग। अंकित ने इन खामियों की जानकारी गूगल के सुरक्षा तंत्र को दी, जिसके बाद एक खामी को स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठाए गए। अंकित के अनुसार, ‘क्रोम इंटेंट वल्नरेबिलिटी’ ऐसी खामी है, जिसमें कोई दुर्भावनापूर्ण वेबपेज बिना अनुमति के सीधे यूपीआई ऐप खोल सकता है। इससे साइबर अपराधियों को यूजर के पेमेंट इंटरफेस तक पहुंच मिल जाती है। दूसरी खामी ‘ऑथेंटिकेशन बायपास’ थी, जिससे ऐप लॉक और बायोमेट्रिक सुरक्षा जैसी पहली सुरक्षा परत को भी पार किया जा सकता था।

अंकित का दावा है कि उनकी रिपोर्ट के बाद कुछ यूपीआई ऐप्स ने इस समस्या को ठीक किया। तीसरी और सबसे खतरनाक खामी ‘ऑडियो हाइजैकिंग’ बताई गई। इसमें बैकग्राउंड में चल रहा नकली ऐप फर्जी ऑडियो चलाकर यूजर को भ्रमित करता है, जैसे ‘पैसे प्राप्त करने के लिए अपना पिन दर्ज करें।’ यूजर को लगता है कि आवाज सीधे भुगतान ऐप से आ रही है और वह धोखाधड़ी का शिकार बन जाता है।

अंकित का कहना है कि यदि सरकार और साइबर सुरक्षा एजेंसियां उनका समर्थन करें तो वे ऑनलाइन बैंकिंग और यूपीआई से जुड़ी साइबर धोखाधड़ी रोकने में अहम योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित डिजिटल भुगतान व्यवस्था आज समय की सबसे बड़ी जरूरत है और तकनीक का उपयोग लोगों की सुरक्षा के लिए होना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला