नारनौल में जिला परिषद की बैठक का पार्षदों ने किया सामूहिक बहिष्कार
17 पार्षदों ने प्रशासन पर विकास कार्य रोकने का लगाया आरोप, 48 घंटे का दिया अल्टीमेटम
नारनाैल, 17 अगस्त (हि.स.)। जिला परिषद की प्रस्तावित बैठक का सोमवार को जिला परिषद के सदस्यों ने सामूहिक रूप से बहिष्कार कर दिया। जिला परिषद के कुल 19 पार्षदों में से 17 बैठक में पहुंचे, लेकिन सभी ने बैठक में शामिल होने के बजाय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए बहिष्कार किया। जिला प्रमुख राकेश कुमार भी पार्षदों के साथ बहिष्कार में शामिल रहे।
पार्षदों ने आरोप लगाया कि जिले में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं और प्रशासन की उदासीनता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में जनहित के काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं। उनका कहना था कि पिछली बैठक में पारित अधिकांश प्रस्तावों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। करीब 300 प्रस्ताव लंबित पड़े हैं, जिनकी अनुमानित लागत 50 से 60 करोड़ रुपये बताई गई है।
पार्षदों ने कहा कि पिछले छह महीनों के दौरान एक भी नया विकास कार्य शुरू नहीं हो सका है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। प्रदर्शन कर रहे सदस्यों ने अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला स्तर पर अधिकारी लंबे समय तक नहीं टिकते और जिला परिषद की बैठकों में भी उनकी उपस्थिति सुनिश्चित नहीं होती।
पार्षदों ने कहा कि सोमवार को प्रस्तावित बैठक में भी अधिकांश विभागों के अधिकारी अनुपस्थित रहे। इसे उन्होंने प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताया। सदस्यों ने विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के भी गंभीर आरोप लगाए। पार्षदों ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि लंबित प्रस्तावों और विकास कार्यों पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से इस्तीफा देने पर विचार करेंगे। उनका कहना था कि जनता ने उन्हें विकास के लिए चुना है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता से वे अपना दायित्व नहीं निभा पा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला

