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नारनौल में घोड़ी पर बैठाकर निकाला बेटी का बनवारा

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नारनौल में घोड़ी पर बैठाकर निकाला बेटी का बनवारा


गांव गहली में दिखी नई सोच की मिसाल

नारनाैल, 24 मार्च (हि.स.)। जिले के गांव गहली में सोमवार रात एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली, जब परिवार ने अपनी बेटी का बनवारा पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति.रिवाजों के साथ निकाला। इस अवसर पर बेटी प्रियंका को घोड़ी पर बैठाकर पूरे गांव में घुमाया गया, जो आमतौर पर बेटों के लिए प्रचलित परंपरा मानी जाती है।

प्रियंका, रूपचंद व राजवण की सुपौत्री तथा सतबीर बडेसरा की बेटी हैं। इस आयोजन में परिवार के सदस्यों के साथ-साथ ग्रामीणों ने भी बढ़.चढ़कर भाग लिया और खुशी का माहौल बना रहा। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक रस्मों के बीच निकाले गए इस बनवारे ने गांव में एक सकारात्मक संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान सहभोज का भी आयोजन किया गया, जिसमें रिश्तेदारों, परिचितों और ग्रामीणों ने मिलकर भोजन किया। इस सामूहिक आयोजन ने सामाजिक एकता और भाईचारे को भी मजबूत किया।

प्रियंका वर्तमान में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) नारनौल में एसडीसी के पद पर कार्यरत हैं। उनका विवाह सौरभ दहिया के साथ तय हुआ है, जो दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं, सीजेएल परीक्षा पास कर चुके हैं और वर्तमान में केरल में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। सौरभ के पिता प्रताप सिंह किसान हैं, जबकि उनकी माता सरिता देवी गृहिणी हैं। परिवार के सदस्यों का कहना है कि आज के समय में बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैंए इसलिए उन्हें भी समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। उनका मानना है कि यदि बेटे वंश को आगे बढ़ाते हैंए तो बेटियां भी उसी वंश की जननी बनकर समाज को आगे ले जाती हैं।

गांव की सरपंच मनजीत देवी ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम समाज में बेटियों के प्रति सोच बदलने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने प्रियंका को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस तरह की पहलें समाज में वास्तविक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला