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नारनौल का ऐतिहासिक जल महल एक दशक बाद पानी से हुआ लबालब

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नारनौल का ऐतिहासिक जल महल एक दशक बाद पानी से हुआ लबालब


म्यूजिकल नाइट्स से बढ़ेगा आकर्षण, पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी

नारनाैल, 17 अगस्त (हि.स.)। नारनौल का गौरव कहे जाने वाले ऐतिहासिक जल महल में करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद पानी भर गया है। पानी से लबालब भरा जल महल अब सैलानियों और स्थानीय नागरिकों के लिए बेहद मनमोहक और दर्शनीय स्थल बन गया है। जल महल को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित किया हुआ है।

उपायुक्त अनुपमा अंजली ने सोमवार को बताया कि जल महल अब आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में उभरकर सामने आया है। जिला प्रशासन की योजना इसे और अधिक जीवंत बनाने की है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग से विधिवत अनुमति लेने के बाद आने वाले समय में यहां शाम के समय संगीत संध्या यानी म्यूजिकल नाइट्स का आयोजन कराया जाएगा। इससे पर्यटकों को ऐतिहासिक धरोहर के बीच मनोरंजन का यादगार अनुभव मिल सकेगा।

डीसी ने नागरिकों से अपील की कि वे बच्चों और परिवार के साथ जल महल देखने जरूर आएं। इससे नई पीढ़ी को क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जल महल पर्यटन का बड़ा केंद्र बनने की पूरी संभावना है।

1591 में नवाब शाह कुली खान ने कराया था निर्माण :

जल महल का निर्माण मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में वर्ष 1591 में नारनौल के तत्कालीन गवर्नर नवाब शाह कुली खान ने कराया था। शुष्क क्षेत्र में प्राकृतिक ढलान और मानसूनी जल संचयन की अद्भुत तकनीक से निर्मित यह जलाशय स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। इसके उत्तर दिशा में बनी ड्योढ़ी, 16 धनुषाकार मेहराबों वाला पुल, अष्टकोणीय गुंबद तथा चारों कोनों पर बने सुंदर कक्ष इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं। पानी भरने के बाद इसकी ऐतिहासिक सुंदरता और भी निखर उठी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला