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नारनाैल: केंद्रीय विश्वविद्यालय में अंग्रेजी अध्ययन की उभरती प्रवृत्तियों पर पाठ्यक्रम शुरू

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नारनाैल: केंद्रीय विश्वविद्यालय में अंग्रेजी अध्ययन की उभरती प्रवृत्तियों पर पाठ्यक्रम शुरू


24 राज्यों के 80 संस्थानों से 142 प्रतिभागी ले रहे हैं प्रशिक्षण में भाग

नारनाैल, 07 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (यूजीसी-एमएमटीटीसी) की ओर से सोमवार को ‘अंग्रेजी अध्ययन में उभरती प्रवृत्तियाँ’ विषयक 11वें पुनश्चर्या पाठ्यक्रम का साेमवार काे शुभारंभ हुआ। पाठ्यक्रम में देश के 24 राज्यों के 80 विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं अन्य संस्थानों से 142 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है।

हकेवि के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि अंग्रेजी आज केवल अंतरराष्ट्रीय भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति और ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। उन्होंने अंग्रेजी अध्ययन को भारतीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप समाजोपयोगी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कुलपति ने कहा कि प्रभावी शिक्षक प्रशिक्षण के लिए संवादपरक और सहभागितापूर्ण दृष्टिकोण जरूरी है। उन्होंने प्रतिभागियों से विषय विशेषज्ञों के साथ सक्रिय संवाद करने तथा पाठ्यक्रम के दौरान प्राप्त ज्ञान का शिक्षण एवं शोध कार्य में प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को बदलते शैक्षणिक परिवेश के अनुरूप अपनी क्षमताओं को विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।

गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अतनु भट्टाचार्य ने अंग्रेजी अध्ययन में तेजी से उभर रहे विभिन्न क्षेत्रों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कॉर्पस भाषाविज्ञान, डिजिटल अभिलेखागार, पर्यावरणीय विमर्श और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों को महत्वपूर्ण बताया। प्रो. भट्टाचार्य ने शिक्षण और शोध में अंतर्विषयक तथा प्रौद्योगिकी आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मानविकी अध्ययन को आधुनिक डिजिटल पद्धतियों के साथ जोड़कर शोध और ज्ञान के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्याम सुंदर शुक्ला