हरियाणा में एमएसएमई के लिए राइट टू बिजनेस एक्ट लागू
जिला स्तर पर 15 और राज्य स्तर पर 10 दिन की समय-सीमा
चंडीगढ़, 21 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा में एमएसएमई के लिए कारोबार शुरू करने और मौजूदा विनिर्माण इकाइयों का विस्तार करने की प्रक्रिया अब समयबद्ध होगी। हरियाणा राइट टू बिजनेस एक्ट, 2026 लागू हो गया है। इसके तहत जिला स्तर पर आवेदन पर 15 कार्यदिवस में फैसला करना होगा। इस अवधि में मंजूरी या अस्वीकृति नहीं मिली तो आवेदन अपने आप राज्य स्तर पर चला जाएगा।
वहां भी 10 कार्यदिवस में फैसला नहीं हुआ तो इन-प्रिंसिपल अप्रूवल को स्वत: मंजूर माना जाएगा। यानी सामान्य स्थिति में आवेदन पर अधिकतम 25 कार्यदिवस में फैसला होना है। डीम्ड अप्रूवल की स्थिति में जिला नोडल एजेंसी को तीन दिन के भीतर प्रमाणपत्र जारी करना होगा। इस संदर्भ में सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। यह सुविधा हर कारोबार को नहीं मिलेगी। इसका लाभ उन पंजीकृत एमएसएमई को मिलेगा जो नई विनिर्माण इकाई स्थापित करना चाहते हैं या मौजूदा विनिर्माण इकाई का विस्तार करना चाहते हैं। इकाई का केंद्र सरकार के उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत होना जरूरी है। उद्यमी को सबसे पहले जिला नोडल एजेंसी के पास ‘डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट’ देना होगा। इसके बाद आवेदन की प्रक्रिया शुरू होगी।
जिला नोडल एजेंसी को 15 कार्यदिवस के भीतर इन-प्रिंसिपल अप्रूवल जारी करना होगा या आवेदन खारिज करना होगा। 15 दिन में फैसला नहीं हुआ तो दूसरा पड़ाव राज्य स्तर है। आवेदन हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर के डिप्टी चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के पास जाएगा। वहां 10 कार्यदिवस में फैसला करना होगा। यहां भी 10 दिन बीत गए और फैसला नहीं हुआ तो तीसरा रास्ता खुलेगा, डीम्ड अप्रूवल। इसके बाद आवेदन मंजूर माना जाएगा और जिला नोडल एजेंसी तीन दिन में प्रमाणपत्र जारी करेगी।
इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिलने के बाद एमएसएमई को 36 महीने यानी तीन साल की मोराटोरियम अवधि मिलेगी। इस दौरान इकाई का सामान्य निरीक्षण नहीं किया जा सकेगा और सामान्य आधार पर जबरन कार्रवाई भी नहीं होगी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तीन साल तक सरकार किसी भी स्थिति में जांच नहीं कर सकेगी। यदि किसी इकाई के खिलाफ शिकायत मिलती है तो निरीक्षण किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित सक्षम प्राधिकरण के प्रमुख को निरीक्षण का कारण लिखित रूप में दर्ज करना होगा। निरीक्षण संयुक्त निदेशक या उससे ऊपर के अधिकारी से कराया जाएगा और जिला नोडल एजेंसी के अध्यक्ष को इसकी पूर्व सूचना देनी होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

